Hazaribagh : जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक संपन्न होने के बाद सीपीएम के जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने इसकी कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि हर बार की तरह बैठक तो हो जाती है, लेकिन जिले की जर्जर सड़कों, गड्ढों और नालों की समस्याओं का समाधान धरातल पर दिखाई नहीं देता.
विकास योजनाओं की समीक्षा का उद्देश्य
सीटू ने कहा कि दिशा समिति का गठन केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा तथा जिला स्तर पर विकास कार्यों के समन्वय के लिए किया गया था. बैठक में पिछली योजनाओं की प्रगति, नई योजनाओं की मंजूरी और विकास कार्यों की समीक्षा शामिल होती है. इसके लिए 100 से 200 पन्नों तक की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है.

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रिपोर्ट समीक्षा प्रक्रिया पर सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही सदस्यों को भारी-भरकम रिपोर्ट सौंप दी जाती है. इतने कम समय में रिपोर्ट का अध्ययन, समीक्षा और योजनाओं पर निर्णय लेना संभव नहीं है. उनका कहना है कि इससे यह संदेह पैदा होता है कि योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन नहीं किया जाता, बल्कि केवल कागजी प्रक्रिया पूरी की जाती है.
स्थलीय जांच अनिवार्य करने की मांग
सीपीएम जिला सचिव ने मांग की कि पिछली बैठक में स्वीकृत कम से कम 25 प्रतिशत योजनाओं का स्थलीय एवं भौतिक सत्यापन होने के बाद ही उन्हें अगली बैठक में मंजूरी दी जाए. उन्होंने कहा कि जब तक विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच नहीं होगी, तब तक दिशा जैसी महत्वपूर्ण बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगी और जनता मूलभूत समस्याओं से जूझती रहेगी.
