Hazaribagh:शहर के हृदय स्थल बड़ा बाजार थाना से लेकर जामा मस्जिद रोड तक सरकारी राशि और जनता के गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसों का मखौल उड़ाने का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है. यहां नगर निगम अथवा संबंधित कार्य विभाग की नाक के नीचे संवेदक द्वारा नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर रातों-रात एक ऐसी घटिया सड़क का निर्माण कर दिया गया है, जो पहली ही बारिश में बहने को तैयार दिख रही है. ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरी सड़क को पुरानी जर्जर सड़क को बिना उखाड़े और बिना स्क्रैपिंग किए ही, उसके ऊपर बमुश्किल आधा इंच अलकतरा और गिट्टी का लेप लगाकर खानापूर्ति कर दी गई है. इस लापरवाही और लूट को लेकर स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और राहगीरों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिन्होंने सीधे तौर पर इसे सरकारी राजस्व की खुली डकैती करार दिया है.
तीन वार्डों की सीमाओं से गुजरती है सड़क, पर तीनों पार्षदों को ‘अंधेरे’ में रखा
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान और संदेहास्पद पहलू यह है कि यह महत्वपूर्ण सड़क हजारीबाग नगर निगम के तीन-तीन प्रमुख वार्ड क्षेत्रों, यानी वार्ड नंबर 14, वार्ड नंबर 17 और वार्ड नंबर 30 से होकर गुजरती है. लेकिन जब स्थानीय जागरूक जनता ने इस घटिया निर्माण को लेकर अपने जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधा, तो जो जवाब मिला उसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी. वार्ड संख्या 14 की पार्षद प्रभा गुप्ता, वार्ड संख्या 17 के पार्षद कुणाल चौरसिया और वार्ड संख्या 30 की महिला पार्षद को भी इस पूरी योजना के बारे में रत्ती भर की जानकारी नहीं है. तीनों ही पार्षदों ने इस योजना से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है कि आखिर यह सड़क किस प्रशासनिक विभाग के द्वारा, किस फंड से और कितनी लागत से बनाई जा रही है. किसी भी पार्षद के पास इस योजना का न तो कोई वर्क ऑर्डर है और न ही कोई आधिकारिक सूचना, जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि इस खेल को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है.

रातों-रात काम तमाम कर ठेकेदार मुकेश हुआ अंडरग्राउंड
स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए संवेदक ने रात के अंधेरे का फायदा उठाया. बिना किसी को भनक लगे, बिना स्टीमेट बोर्ड लगाए और बिना गुणवत्ता मानकों का पालन किए रातों-रात आनन-फानन में पिचिंग का काम निपटा दिया गया. जनता के सवालों से बचने के लिए मुकेश नाम का कोई कथित ठेकेदार, जो इस कार्य को करा रहा है, अब पूरी तरह से अंडरग्राउंड हो गया है. जब स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों ने वस्तु स्थिति जानने के लिए उसके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, तो उसने फोन उठाना ही बंद कर दिया है. ठेकेदार का यह रवैया साफ जाहिर करता है कि निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है और वह अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से भाग रहा है.
जनता के टैक्स के पैसों की डकैती पर, उच्च स्तरीय जांच की उठ रही मांग
सड़क निर्माण के इस अजूबे खेल को लेकर पूरे बड़ा बाजार और जामा मस्जिद रोड इलाके के लोग बेहद उद्वेलित हैं. नागरिकों का कहना है कि एक तरफ शहर की जनता पाई-पाई का टैक्स ईमानदारी से चुकाती है, ताकि उन्हें बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. वहीं दूसरी तरफ रसूखदार ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से रातों-रात उनके पैसों को पानी में बहा दिया जाता है. बिना सड़क उखाड़े महज आधा इंच का मटेरियल साटने से यह सड़क कुछ ही दिनों में टूट जाएगी और स्थिति पहले से भी बदतर हो जाएगी. इस विकट स्थिति को देखते हुए लोगों ने जिला उपायुक्त, नगर आयुक्त और विजिलेंस विभाग से मांग की है कि इस अवैध और घटिया निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए, संवेदक मुकेश के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो और इस बात की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि आखिर किसकी शह पर तीन-तीन वार्डों के पार्षदों को अंधेरे में रखकर यह लूट का खेल खेला गया.
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