Ranchi: झारखंड में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मॉडल लागू कराने वाला अनवर ढेबर समेत अन्य लोगों का 1000 करोड़ रूपये की संपत्तियां को ईडी ने अटैच किया है. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में ईडी ने यह कार्रवाई की है. उल्लेखनीय है कि अनवर ढेबर के इशारे पर झारखंड में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मॉडल सुनियोजित साजिश के तहत लागू किया गया था. छत्तीसगढ़ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शराब घोटाले की जांच के दौरान इस बात की पुष्टि हुई थी. छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़े अभियुक्तों ने PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज कराये गये बयान में इस बात को स्वीकार किया था. छत्तीसगढ़ ईडी ने कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है. झारखंड शराब घोटाले मामले में झारखंड एसीबी ने बीते 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के कारोबारी अनवर ढेबर से रायपुर जेल में पूछताछ की थी. अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाला का मुख्य आरोपी के साथ झारखंड में भी हुए शराब घोटाले का सूत्रधार है. अनवर ढेबर से एसीबी की टीम ने वर्ष 2022 में झारखंड में लाई गई नई उत्पाद नीति के संबंध में पूछताछ की थी. पूछा गया कि छत्तीसगढ़ मॉडल पर लाई गई नई उत्पाद नीति में विनय चौबे ने किन-किन लोगों को उपकृत किया था.

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विनय चौबे ने चहेते को मैनपावर सप्लाई, होलोग्राम सप्लाई का दिया था काम
विनय चौबे के कार्यकाल में ही मई 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल पर नई उत्पाद नीति लाई गई थी. इसके लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एपी त्रिपाठी को सलाहकार नियुक्त किया गया था. विनय कुमार चौबे को त्रिपाठी व उसके सिंडिकेट ने पूरा सहयोग किया था. कारोबारी अनवर ढेबर अरुण पति त्रिपाठी का काफी करीबी है.
2,883 करोड़ रुपये का सिंडिकेट और मुख्य सरगना
ईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर में दर्ज ईओडब्ल्यू, एसीबी की प्राथमिकी के आधार पर यह पूरी कार्रवाई की जा रही है. जांच में खुलासा हुआ है कि अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अनिल टुटेजा की अगुवाई वाले एक शक्तिशाली शराब सिंडिकेट ने वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के पूरे उत्पाद शुल्क तंत्र में सुनियोजित तरीके से हेरफेर किया था. इस सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ अधिकारी, डिस्टिलरी मालिक और निजी संस्थाएं शामिल थीं. शराब की खरीद दरों में कृत्रिम बढ़ोतरी, बिना हिसाब-किताब वाली अवैध शराब का गुप्त निर्माण और पसंदीदा संस्थाओं को एफएल-10ए (FL-10A) लाइसेंस जारी कर भारी कमीशन वसूला गया. इसके जरिए सिंडिकेट ने कुल 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की ‘अपराध की कमाई अर्जित की थी.
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विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर की संपत्ति
ईडी कोर्ट का पहला आदेश विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से संबंधित अचल संपत्तियों से जुड़ा है. विकास अग्रवाल इस सिंडिकेट के लिए जमीनी स्तर पर वित्तीय प्रबंधक के रूप में काम कर रहा था, जो डिस्टिलरी और FL-10A लाइसेंसधारियों से कमीशन वसूल कर सीधे अनवर ढेबर तक पहुंचाता था. इस आदेश के तहत विकास अग्रवाल के परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियां और अनवर ढेबर की बेनामी संपत्तियां (रायपुर के ढेबर सिटी होम्स में कई प्लॉट और विभिन्न शेल कंपनियों जैसे मैसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मूनलाइट रियल एस्टेट, स्वर्ण इन्फ्राबिल्ड और जय गुरुदेव इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम दर्ज जमीनें) कुर्क की गई हैं.
होटल वेस्टिन गोवा की कुर्की
ईडी कोर्ट के दूसरे आदेश के तहत उत्तरी गोवा के अंजुना गांव में स्थित एक प्रीमियम होटल संपत्ति होटल वेस्टिन गोवा को कुर्क किया गया है. यह संपत्ति मैसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं. ईडी की जांच में पाया गया कि इस होटल को खरीदने के लिए लगभग110 करोड़ की रकम सीधे तौर पर शराब घोटाले की अवैध कमाई से बिना हिसाब-किताब वाले नकद के रूप में दी गई थी और इस नगदी को चैतन्य बघेल के कहने पर वहां पहुंचाया गया था.
शराब लाइसेंसधारी कंपनियों के बैंक खाते और शेयर
कोर्ट के तीसरे आदेश के तहत तीन प्रमुख FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों, मैसर्स ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स डिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, और मैसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों, शेयरों और म्यूचुअल फंड को कुर्क किया गया है. इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा जबरन इस सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था.
