Vinit Abha Upadhyay
Ranchi : राजधानी स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज RIMS के लिए अधिग्रहित की गई कीमती जमीन को फर्जी दस्तावेजों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से निजी हाथों में बेचने के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ एंटी-करप्शन ब्यूरो ACB की जांच में हुआ है. इस मामले में एफआईआर FIR दर्ज होने के बाद एजेंसी लगातार जांच कर रही है. अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि घोटाले की पूरी पटकथा एक गहरी आपराधिक साजिश के तहत लिखी गई थी. वर्ष 1967-68 में राज्य सरकार ने रिम्स के विस्तार के लिए मोरहाबादी मौजा के खाता संख्या 107, प्लॉट संख्या 1693 के तहत लगभग 60 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया था. SAR कोर्ट ने 1992-93 में ही सोनमैत देवी नामक महिला द्वारा खतियानी रैयत का वंशज होने के दावे को खारिज कर दिया था. इसके बाद जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित कर अंचलाधिकारी की देखरेख में दे दिया गया था और रजिस्टर-II में इसका स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन अंचल कार्यालय, रांची नगर निगम, रजिस्ट्री ऑफिस, RERA और RRDA के अधिकारियों व भू-माफियाओं ने आपस में साठगांठ की. खारिज दावे के बाद भी अंचल अधिकारी की मिलीभगत से फर्जी रसीदें काटी गई और रजिस्टर-II के रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया.
सोनू शरण ने पत्नी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री की
इस पुरे मामले में सबसे बड़ा खेल सोनू शरण ने किया. उसने सबसे पहले फर्जी वंशावली बना कर सोनमैत देवी से इस भूमि का पावर लिया. उसके बाद उस पावर के आधार पर अपनी पत्नी पूजा के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कर दी. एसीबी की पूछताछ में सोनमैत देवी ने स्वीकार किया कि सोनू शरण एक ऐसा प्रॉपर्टी डीलर था जो उसे केवल अंगूठा लगवाने के लिए रजिस्ट्री ऑफिस ले जाता था. इसके लिए सोनू शरण और सोनमैत देवी के बीच यह करार हुआ था कि जितनी जमीन की रजिस्ट्री में सोनमैत देवी अंगूठा लगाएगी, उतनी जमीन के बदले प्रत्येक कठ्ठा के हिसाब से 1 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा. सोनू ने एडवांस के तौर पर सोनमैत देवी को 8 लाख रुपए की रकम का चेक दिया गया और 1 लाख 51 हजार रुपए नकद दिया गया.
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