Hazaribagh: चौपारण प्रखंड के बेला, लोहण्डी, मानगढ़ एवं कोयली क्षेत्र के किसानों के लिए प्रस्तावित चेकडेम एवं लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं का मंगलवार को बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने शिलान्यास किया. लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इन योजनाओं को क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. स्थानीय किसानों को उम्मीद है कि परियोजनाओं के पूरा होने के बाद खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी.

शिलान्यास के साथ शुरू हुई श्रेय की राजनीति
परियोजनाओं के शिलान्यास के तुरंत बाद पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने इन योजनाओं के श्रेय को लेकर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने दावा किया कि इन परियोजनाओं की मूल अवधारणा और पहल उनके विधायक कार्यकाल के दौरान हुई थी. अकेला ने कहा कि 19 जून 2024 को उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन से मुलाकात कर बेला, लोहण्डी, मानगढ़ एवं कोयली क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए चेकडेम और लिफ्ट इरिगेशन योजना की मांग रखी थी. इस संबंध में मुख्यमंत्री को अनुशंसा पत्र भी सौंपा गया था.
किसानों को लाभ मिले, यही सबसे बड़ी खुशी
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि किसानों के हित में शुरू की गई योजना अब धरातल पर उतर रही है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि योजना की शुरुआत किन प्रयासों से हुई थी. उनका कहना है कि वर्तमान विधायक को जिन योजनाओं का शिलान्यास करने का अवसर मिला है, उनकी मांग और स्वीकृति के लिए संघर्ष उन्होंने अपने कार्यकाल में शुरू किया था.
नींव रखने वालों को इतिहास याद रखता है
अपने बयान में उमाशंकर अकेला ने कहा कि राजनीति में किसी योजना का श्रेय लेना आसान है, लेकिन उसे स्वीकृति दिलाने के लिए लगातार प्रयास, दूरदृष्टि और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा, “नींव रखने वालों को इतिहास याद रखता है और शिलान्यास करने वालों को सिर्फ तस्वीरें.” पूर्व विधायक ने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक, सौंपे गए अनुशंसा पत्र और उससे जुड़ी तस्वीरें आज भी उपलब्ध हैं, जो परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका को प्रमाणित करती हैं.
क्षेत्र में तेज हुई राजनीतिक चर्चा
पूर्व विधायक के इस बयान के बाद क्षेत्र में विकास योजनाओं के श्रेय को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. एक ओर समर्थक इसे पूर्व विधायक की दूरदृष्टि का परिणाम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान जनप्रतिनिधि के समर्थक इसे सरकार और वर्तमान नेतृत्व की उपलब्धि मान रहे हैं. हालांकि राजनीतिक दावों और प्रतिदावों के बीच क्षेत्र के किसानों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि परियोजनाएं तय समय पर पूरी हों और उन्हें सिंचाई की स्थायी सुविधा मिल सके.
