रांची: आश्रय गृहों को लेकर नगर निगम प्रशासन सख्त, जर्जर शेल्टर हटेंगे, चार नए बनेंगे

रांची: शहर के आश्रय गृहों की खराब व्यवस्था और बढ़ती जरूरत को देखते हुए रांची नगर निगम प्रशासन अब एक्शन मोड में...

रांची: शहर के आश्रय गृहों की खराब व्यवस्था और बढ़ती जरूरत को देखते हुए रांची नगर निगम प्रशासन अब एक्शन मोड में आ गया है. शुक्रवार को निगम प्रशासक सुशांत गौरव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई, जिसमें आश्रय गृहों की व्यवस्था सुधारने, नए शेल्टर बनाने और अवैध कब्जे हटाने को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए.

सभी आश्रय गृहों का होगा क्वालिटी ऑडिट

बैठक में प्रशासक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर के सभी संचालित आश्रय गृहों का वरीय पदाधिकारियों से क्वालिटी ऑडिट कराया जाए. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां रहने वाले लोगों को रहने, साफ-सफाई, पानी, बिजली और सुरक्षा जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं मिलें.

चार नए आश्रय गृह जल्द बनेंगे

नगर निगम द्वारा शहर में चार नए आश्रय गृह बनाने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया. ये आश्रय गृह बूटी मोड़, खादगढ़ा (महिला आश्रय गृह), नागा बाबा खटाल स्थित एमआरएफ सेंटर के पास और आईटीआई बस स्टैंड क्षेत्र में बनाए जाएंगे. अधिकारियों को इन योजनाओं को जल्द धरातल पर उतारने को कहा गया.

इसके अलावा तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) समुदाय के लिए नागा बाबा खटाल स्थित एमआरएफ सेंटर की जमीन पर अलग से आश्रय गृह बनाने का प्रस्ताव भी तैयार करने का निर्देश दिया गया.

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जर्जर और असुरक्षित आश्रय गृह हटेंगे

बैठक में आईटीआई बस स्टैंड, एजी मोड़ डोरंडा और कर्बला चौक स्थित तीन आश्रय गृहों की स्थिति को गंभीर माना गया. ये आश्रय गृह जर्जर, असुविधाजनक और सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक पाए गए हैं। इसे देखते हुए प्रशासक ने इन्हें हटाने का निर्देश दिया.

रैन बसेरों में अवैध कब्जे पर कार्रवाई

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2014 में रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण ने रातू रोड (आकाशवाणी के पास), बिरसा चौक, एजी मोड़ और पिस्का मोड़ स्थित चार रैन बसेरा नगर निगम को सौंपे थे. इन रैन बसेरों में बनी दुकानों का आवंटन सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देश पर रद्द कर दिया गया था और वर्ष 2011 से इनसे राजस्व वसूली भी बंद है.

इसके बावजूद इन भवनों में कई जगहों पर अवैध कब्जे पाए गए हैं. इस पर प्रशासक ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी अवैध कब्जों को हटाकर इन भवनों को जनहित के कार्यों के लिए विकसित करने का निर्देश दिया.

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