Ranchi: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अबुआ अधिकार मंच ने रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर परिसर में विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. इस दौरान मंदिर परिसर में बांस और कल्पतरु के पौधे लगाए गए तथा लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया. कार्यक्रम में अबुआ अधिकार मंच के संस्थापक वेदांत कौस्तव ने कहा कि पहाड़ी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रांची की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. झारखंड की असली पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी रही है, इसलिए प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि बांस के पौधों का चयन सोच-समझकर किया गया है, क्योंकि यह तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद करता है. साथ ही कम समय में हरियाली बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पहाड़ी मंदिर की हरित पहचान को फिर से मजबूत करना है.

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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कल्पतरु वृक्ष का रोपण
कार्यक्रम के दौरान कल्पशक्ति फाउंडेशन के संस्थापक निखिल मेहुल ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ कल्पतरु वृक्ष का रोपण किया. उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण छोड़ना हम सभी का दायित्व है. वहीं वार्ड-29 के पार्षद सुनील यादव ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने लोगों से लगाए गए पौधों की जिम्मेदारी लेने और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की.
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