Ranchi: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर वन विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और हरित भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं. कार्यक्रम में PCCF और HOFF संजीव कुमार, डीएफओ श्रीकांत वर्मा समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. वहीं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भी भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

बच्चों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, जागरूकता गतिविधियों और पर्यावरण विषयक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रकृति बचाने का संदेश दिया. इस अवसर पर वन विभाग ने साफ किया कि आने वाले समय में सिर्फ पौधरोपण ही नहीं, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने पर भी विशेष अभियान चलाया जाएगा.
जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता
पीसीसीएफ एवं HoFF संजीव कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर आम लोगों के जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है. बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और जल संकट जैसी समस्याएं पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को और अधिक गंभीर बनाती हैं.
प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील
उन्होंने लोगों से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और उसके स्थान पर जूट व कागज से बने उत्पादों को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल होगा, जब इसमें सरकार के साथ-साथ आम नागरिक भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे.
जल स्रोतों के संरक्षण की विशेष योजना
संजीव कुमार ने बताया कि वन विभाग राज्य में जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए नदियों के उद्गम स्थलों और उनके कैचमेंट क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष संरक्षण योजना पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और भविष्य में जल संकट की आशंकाओं को कम करना है.
डेढ़ करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि विभाग ने वर्ष 2026 में लगभग डेढ़ करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. पौधरोपण अभियान में ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी पैदा कर सकें.
हरियाली बढ़ाने के साथ रोजगार पर भी फोकस
वन विभाग का मानना है कि बड़े पैमाने पर पौधरोपण से न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि भू-क्षरण पर रोक लगेगी, भूजल स्तर बेहतर होगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण मिल सकेगा.
