Palamu: पलामू जिले के नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना भी अब पूरी तरह विफल साबित हो रही है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पांच पंचायतों के 32 गांवों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन रखरखाव की घोर लापरवाही के कारण योजना का मुख्य इंटेक वेल पिछले दो महीनों से खराब पड़ा है, जिसने पूरी जलापूर्ति व्यवस्था को ठप कर दिया है.

25 करोड़ की योजना हुई बेअसर
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस या संवेदनशील पहल नहीं की जा रही है. क्षेत्र के कई गांवों में सुचारू रूप से चलने वाली नल-जल योजना अब सफेद हाथी साबित हो रही है और अधिकांश जलमीनारें महीनों से तकनीकी खराबी के कारण बेकार पड़ी हैं. इसके साथ ही भूजल स्तर गिरने और समय पर मरम्मत न होने से इलाके के अधिकांश चापाकल भी दम तोड़ चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को इस तपती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए कई किलोमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ रहा है. पानी के इस विकट संकट का सबसे ज्यादा खामियाजा घर की महिलाओं, मासूम बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें सुबह से ही पानी के इंतजाम में जुटना पड़ता है.
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महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि योजना के शिलान्यास और निर्माण के समय प्रशासन द्वारा हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत आज इसके बिल्कुल उलट है. करोड़ों की यह सरकारी योजना अधिकारियों और संवेदक की उदासीनता के कारण कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर है. परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब गुहार लगाते हुए बंद पड़े इंटेक वेल को दुरुस्त करने, खराब जलमीनारों और चापाकलों की युद्धस्तर पर मरम्मत कराने तथा नियमित जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है. अब क्षेत्र में यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बनकर उभरा है कि जब जनता के टैक्स के 25 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, फिर भी अगर ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, तो इस महाविफलता की जवाबदेही आखिर किस अधिकारी या विभाग पर तय की जाएगी?
