EXCLUSIVE: आत्मसमर्पण नहीं करेगा एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा, कहा- जिसे जाना है जाए, वह गोली खाने को तैयार

SAURAV SINGH Ranchi: भाकपा माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ इनामी मिसिर बेसरा आत्मसमर्पण नहीं करेगा. सूत्रों से मिली...

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Ranchi: भाकपा माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ इनामी मिसिर बेसरा आत्मसमर्पण नहीं करेगा. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सेंट्रल एजेंसी ने उससे संपर्क किया था, उसे ओडिशा में आत्मसमर्पण कराने की योजना थी. हालांकि, उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था. साथ ही उसने अपने साथियों से यह भी कहा है कि जिसे जाना है वह जा सकते है, वह गोली खाने को तैयार हैं. इस बात की पुष्टि भी हुई. माओवादी संगठन के वरिष्ठ सदस्य मधाई पात्रा ने करीब 30 साल पुराना नाता तोड़ते हुए कोलकाता में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण के समय उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मिसिर बेसरा से अनुमति मिलने के बाद ही उसने आत्मसमर्पण किया है.

सारंडा में नौ कैडरों के साथ कैंप कर रहा मिसिर बेसरा

बीते कुछ दिनों से चर्चा थी कि मिसिर बेसरा पुरुलिया के रास्ते अपने गृह जिला गिरिडीह लौट आया है. लेकिन जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार मिसिर बेसरा कहीं नहीं गया है और वह अपने नौ साथियों के साथ सारंडा जंगल में कैंप कर रहा है. इसके अलावा नक्सली कमांडर असीम मंडल पांच और सलूका कायम सात नक्सली कैडरों के साथ सारंडा इलाके में कैंप कर रहा है.

एजेंसियों के संपर्क में परिवार

मिसिर बेसरा का परिवार खुफिया एजेंसियों के संपर्क में है. कुछ महीने पहले उसके बेटे ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पिता से मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी. वीडियो में बेटे ने कहा था कि परिवार चाहता है कि मिसिर बेसरा अब घर लौट आए और अपना बुढ़ापा परिवार के बीच बिताए. जानकारी के अनुसार, मिसिर बेसरा के माओवादी बनने के बाद उसकी पत्नी घर छोड़ चुकी है, जबकि बेटा संघर्ष कर पढ़ाई पूरी करने के बाद बाहर काम करने चला गया. सूत्रों के मुताबिक, बेटे ने कई बार सारंडा और कोल्हान के जंगलों में जाकर पूर्व नक्सलियों और समर्थकों के माध्यम से पिता तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक इसका कोई असर नहीं हुआ है.

कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है मिसिर

वर्ष 1990 में माओवादी संगठन से जुड़ा मिसिर बेसरा कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है. वह संगठन की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का सदस्य रह चुका है. इसके अलावा वह सेंट्रल मिलिट्री कमिशन का प्रमुख भी बताया जाता है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वर्ष 2004 में 32 जवानों की हत्या की घटना में भी उसकी भूमिका रही थी. वर्ष 2007 में उसे रांची से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट कॉम्प्लेक्स पर हुए माओवादी हमले के बाद वह फरार हो गया. वर्तमान में NIA भी उसके खिलाफ जांच कर रही है.

जनवरी मुठभेड़ के बाद बदले हालात

जानकार बताते हैं कि जनवरी 2026 में कई माओवादी संगठन आत्मसमर्पण की दिशा में बातचीत कर रहे थे. बताया जाता है कि कुछ नक्सलियों ने सुरक्षित आत्मसमर्पण के लिए संपर्क भी साधा था. लेकिन 22 और 23 जनवरी को सारंडा के कुमड़ीह इलाके में सुरक्षा बलों और एक करोड़ के इनामी अनल दा के दस्ते के बीच मुठभेड़ हो गई. इस कार्रवाई में सात महिला नक्सलियों समेत 17 उग्रवादी मारे गए. इसके बाद माओवादी संगठनों ने अपना रुख बदल दिया और फिर से जंगलों में सक्रिय हो गए.

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