Ranchi: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए जो स्क्रिप्ट लिखी जा रही है, उसने अच्छे-अच्छे राजनीतिक गणितज्ञों को अंकगणित भूलकर शह-मात के खेल पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर कर दिया है. कहने को तो सीटें सिर्फ दो हैं, लेकिन चुनावी मैदान में फॉर्म 6 बिक चुके हैं. राजनीति का पुराना नियम है, धुआं तभी उठता है, जब आग लगी हो. इस बार आग लगाने के लिए बाहर से ऐसे फायरब्रांड खिलाड़ी आए हैं, जो खेल बिगाड़ने में माहिर माने जाते हैं. फिलहाल सस्पेंस बरकरार है.

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असली सस्पेंस 8 जून को होगा खत्म
राज्यसभा चुनाव की सबसे दिलचस्प पहेली नामांकन के वक्त 10 विधायकों (प्रस्तावकों) के हस्ताक्षर की होती है. झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें, तो महागठबंधन के पास 56 वोटों का भारी-भरकम और सुरक्षित दिखने वाला आंकड़ा है. लेकिन फिर भी सत्ता के गलियारों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है. सवाल यह नहीं है कि किसके पास कितने वोट हैं, बल्कि असली सस्पेंस यह है कि 8 जून को जब नामांकन पत्रों की जांच होगी, तो किस प्रस्तावक के दस्तखत किस उम्मीदवार के पर्चे पर मिलेंगे. जब 10 प्रस्तावकों की जरूरत होती है, तो अचानक से हर विधायक खुद को किंगमेकर समझने लगता है.
महागठबंधन के 56 विधायक फिलहाल एक ऐसे किले की तरह दिख रहे हैं, जिसके दरवाजे तो बंद हैं, लेकिन खिड़कियों से बाहरी हवा अंदर आ रही है. नथवानी और रेड्डी जैसे महारथी बिना किसी ठोस आश्वासन या गणित के 6 फॉर्म बिकने की इस गहमागहमी का हिस्सा नहीं बने हैं. यहां जादुई नंबर की शह-मात में जो दिखता है, वो होता नहीं. और जो होता है, वो 8 जून से पहले कोई कबूलता नहीं.
