पहाड़ों से घिरे गांव में युवक ने खुद बनाई इंटरनेट की राह, अब घर बैठे मिल रहा 20 Mbps नेटवर्क

Chaibasa : डिजिटल युग में जहां इंटरनेट लोगों की जरूरत बन चुका है. वहीं पश्चिम सिंहभूम के एक दूरस्थ आदिवासी गांव में...

Chaibasa : डिजिटल युग में जहां इंटरनेट लोगों की जरूरत बन चुका है. वहीं पश्चिम सिंहभूम के एक दूरस्थ आदिवासी गांव में आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है. चारों ओर पहाड़ों से घिरे इस गांव में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं पकड़ता है. ग्रामीणों को फोन करने या इंटरनेट चलाने के लिए करीब दो किलोमीटर दूर सावनिया के मडडीह टोली की ओर जाना पड़ता है या फिर पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. इस समस्या के हल के लिये ग्रामीण लाक्षुराम मुंडरी ने प्रयास किया. लाक्षुराम मुंडरी ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में USOF (यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड) के माध्यम से मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. लेकिन उनका गांव अब भी इससे वंचित है. इंटरनेट और संचार सुविधा के अभाव में गांव का जीवन उन्हें आजादी से पहले के दौर जैसा महसूस होता था.

20 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलने लगी

इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए लाक्षुराम मुंडरी ने तकनीकी प्रयोग करने का निर्णय लिया. उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से TP-Link MR100 4G Wi-Fi Router और LPDA 12 dBi 4G एंटीना मंगवाया. इसके बाद एक ऊंचे बांस के सहारे एंटीना को स्थापित किया और केबल के माध्यम से उसे राउटर से जोड़ दिया.
इस व्यवस्था को स्थापित करने के बाद उनके घर में लगभग 20 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलने लगी. अब वे घर बैठे इंटरनेट का उपयोग कर पा रहे हैं. इस अनोखे प्रयोग को देखकर गांव के अन्य ग्रामीण भी आश्चर्यचकित हैं और इसे तकनीक के माध्यम से ग्रामीण समस्याओं के समाधान का एक बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं.

बच्चों की पढ़ाई, ऑनलाइन सेवाओं में पड़ेगा असर

लाक्षुराम मुंडरी का कहना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग उनके गांव में मोबाइल टावर या नेटवर्क सुविधा उपलब्ध करा दें तो गांव के बच्चों की पढ़ाई, ऑनलाइन सेवाओं और ग्रामीणों के संचार में काफी सुधार होगा. उन्होंने कहा कि तकनीक का सही उपयोग करके कठिन परिस्थितियों में भी समाधान निकाला जा सकता है, लेकिन स्थायी व्यवस्था के लिए नेटवर्क अवसंरचना का विकास जरूरी है.
ग्रामीणों ने भी सरकार से मांग की है कि उनके गांव को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि डिजिटल भारत का लाभ दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों तक भी पहुंच सकें.

 

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