रांची में मजदूर बेहाल: नहीं बन रहा श्रम कार्ड, दलालों ने वसूले पैसे, विभाग बना मूकदर्शक

Ranchi: राजधानी रांची में रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूर इन दिनों श्रम कार्ड नहीं बनने की...

Ranchi: राजधानी रांची में रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूर इन दिनों श्रम कार्ड नहीं बनने की समस्या से जूझ रहे हैं. कभी काम मिलता है तो कभी खाली हाथ घर लौटना पड़ता है. ऐसे में सरकार द्वारा मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई ई-श्रम योजना उनके लिए सहारा बन सकती थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है. मजदूरों का आरोप है कि श्रम विभाग की उदासीनता और दलालों के खेल के कारण वे योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं. ई-श्रम कार्ड के जरिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को दुर्घटना की स्थिति में दो लाख रुपये तक का बीमा, विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर तथा अन्य सरकारी लाभ मिलने का प्रावधान है.

कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे मजदूर

रांची के विभिन्न इलाकों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले श्रम कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन आज तक उनका कार्ड नहीं बन पाया. कई मजदूरों का आरोप है कि आवेदन के नाम पर उनसे पैसे भी लिए गए, लेकिन न तो कार्ड मिला और न ही कोई जानकारी दी गई. मजदूरों का कहना है कि जब वे श्रम विभाग या संबंधित कार्यालयों में शिकायत लेकर पहुंचते हैं तो उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता. कई बार चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है.

दलालों का बढ़ता नेटवर्क

श्रमिकों के अनुसार, कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में दलाल सक्रिय हैं. कुछ लोगों ने मजदूरों से कार्ड जल्द बनवाने के नाम पर पैसे वसूले, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कार्ड जारी नहीं हुआ. इससे गरीब मजदूरों की परेशानी और बढ़ गई है. रोज कमाने-खाने वाले इन लोगों के लिए कुछ सौ रुपये भी बड़ी रकम होती है.

बन गया कार्ड, फिर भी नहीं मिला

कुछ मजदूरों का आरोप है कि उनका श्रम कार्ड बन चुका है, लेकिन उन्हें कार्ड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा. कई लोगों को यह तक नहीं बताया गया कि उनका आवेदन किस स्थिति में है. नतीजतन, वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हैं.

रोटी की चिंता, सुरक्षा भी अधर में

दिहाड़ी मजदूरों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके घर में अगले दिन चूल्हा जलेगा या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं होती. ऐसे में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. लेकिन कार्ड नहीं बनने के कारण वे बीमा, पेंशन और अन्य सुविधाओं से दूर हैं. ई-श्रम योजना का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को सुरक्षा कवच देना है, लेकिन रांची में कई मजदूर अभी भी इस कवच से बाहर हैं.

श्रम विभाग पर उठ रहे सवाल

मजदूरों का आरोप है कि श्रम विभाग के अधिकारी उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं. बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से मजदूरों में नाराजगी बढ़ रही है. उनका कहना है कि अधिकारी “काम में तेल डालकर सो रहे हैं” और गरीब श्रमिकों की परेशानियों का उन पर कोई असर नहीं पड़ता.

मजदूरों की मांग

श्रमिकों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि श्रम कार्ड से जुड़ी शिकायतों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए. साथ ही लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा कर पात्र मजदूरों को उनका श्रम कार्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें.

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