Chatra: वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में बसे जिले के लावालौंग प्रखंड के कई गांव आज भी सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. इन्हीं समस्याओं को लेकर लावालौंग प्रखंड मुख्यालय में विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने सिस्टम के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि लावालौंग प्रखंड के वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र से जुड़े कई गांव, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण लोग वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. दर्जनों गांवों के वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में आने के कारण विकास कार्य वर्षों से प्रभावित हैं. सड़क निर्माण, बिजली विस्तार और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सुविधाएं आज भी कई गांवों तक नहीं पहुंच सकी हैं.
लावालौंग–पांकी सड़क निर्माण को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कई बार जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक और सांसद को ज्ञापन सौंपने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. धरना में ग्रामीणों ने लावालौंग–पांकी सड़क निर्माण को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया. उनका कहना है कि बरसात के दिनों में जर्जर सड़क के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे मरीजों, विद्यार्थियों और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. साथ ही क्षेत्र में बिजली आपूर्ति और मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है.
15 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान विधायक और सांसद ने सड़क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों का भरोसा दिया था, लेकिन चुनाव के बाद वादे पूरे नहीं किए गए. प्रदर्शन के दौरान “सांसद होश में आओ”, “विधायक होश में आओ” और “झूठे वादे बंद करो” जैसे नारे भी लगाए गए.
धरना के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि 15 अगस्त तक सड़क, बिजली और नेटवर्क की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन, भूख हड़ताल और आवश्यकता पड़ने पर फिर से वोट बहिष्कार जैसे जन आंदोलन शुरू करेंगे. धरना में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
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