Koderma : आज हम भले ही 21वीं सदी में जी रहें हो और चांद पर जाने की बातें हो रहीं हैं. लेकिन अभी भी कई ऐसे इलाके हैं जहां विकास की बातें तो दूर विकास की किरण तक नहीं पहुंची है. आश्चर्य तो तब होता हैं जब पता चलता हैं कि इन्हें वोट देने का अधिकार तो मिल गया लेकिन एक अदद राशनकार्ड के लिए लोग यहां तरह रहें हैं. हम बात कर रहें हैं कोडरमा के गझंडी पंचायत के झुमकगाढा की, जहां करीब 35 से 40 की संख्या में झारखंड की आदिम जनजाति मुंडा परिवार निवास करती हैं. यहां रहने वाले मुंडा परिवार किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार बसर कर रहें हैं. यहां के लोगों के लिए ना तो सड़क हैं ना ही बिजली ,पानी और कई मूलभूत सुविधा. यहां के लोग किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहें हैं. यहां गुजर रहे मुंडा समुदाय के लोगों ने बताया ये लोग करीब 2002 से रह रहें हैं लेकिन उनलोगों का कोई भी सरकारी योजना से जुड़ा कार्ड आज तक नहीं बन पाया हैं जबकि उनका आधार और वोटर आईडी कार्ड जरूर बना है.
न सड़क, न पानी, न स्वास्थ्य सुविधा, झुमकागाढ़ा की उपेक्षा पर उठे सवाल
मतलब साफ है की इन्हें वोट देने का अधिकार हैं लेकिन सरकार की कोई भी योजना का लाभ लेने का इन्हें कोई अधिकार नहीं दिया गया हैं. ये लोग किसी तरह मजदूरी कर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते है. यहां रहने वाले लोगों ने कहा कि इन्हें आज तक कोई सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है. लोगों ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हो जाती है जब गांव का कोई वयक्ति बीमार हो जाता है, खटिये या कंधे पर किसी तरह ये गझंडी पहुंचते हैं और कभी-कभी तो कई मरीज की रास्ते मे ही मौत हो जाती है. झुमकागढ़ा के लोगों ने बताया की सबसे ज्यादा डर उन्हें रात में जंगली जानवर से लगता है. कभी-कभी तो सर्प दंश से इलाज के अभाव में लोगों की मौत भी हो जाती हैं. बता दें कि की झुमकगाढा के लोगों को इस भीषण गर्मी में अपनी प्यास बुझाना भी मुश्किल हो रहा हैं. किसी तरह चुआ खोदकर ये लोग बड़ी मुश्किल से अपनी प्यास बुझा पाते हैं. झुमकगाढा के लोग पिछले दो दशक से विकास की बाट जोह रहें हैं. यहां मूलभूत सुविधा तो दूर कोई अधिकारी इनकी सुध तक लेने नहीं आते. कुल मिलाकर गझण्डी पंचायत का झुमका गाढ़ा विकास से कोसों दूर हैं यहां के लोग आज भी आदिम युग मे जीने को मजबूर हैं.

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