Deoghar: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) दुमका की टीम ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने देवघर जिले के करौं प्रखंड के डिण्डाकोली पंचायत में तैनात मनरेगा के जूनियर इंजीनियर संतोष प्रसाद को पांच हजार रुपया की रिश्वत लेते हुए उनके सरकारी आवास से रंगे हाथों गिरफ्तार किया है.
क्या है पूरा मामला:
एसीबी से मिली जानकारी के अनुसार, देवघर जिले के करौं थाना क्षेत्र के डिण्डाकोली (लकरछारा) ग्राम निवासी भीम कुमार राणा (उम्र 29 वर्ष, पिता- मधु राणा) ने एसीबी के पास एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता ने बताया था कि मनरेगा योजना (योजना संख्या: 07/2024-25) के तहत उनकी अपनी निजी जमीन पर ‘ट्रेंच सह बांध’ (Trench-cum-Bund) निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ था. इस पूरी योजना की कुल लागत 45 हजार रुपया थी, जिसमें से वह काम पूरा कर चुके थे और उन्हें 41 हजार रुपया का भुगतान भी हो चुका था.

फाइनल बिल के बदले मांगी थी रिश्वत:
योजना के अंतिम भुगतान (फाइनल बिल निकासी) के लिए मास्टर रोल जमा करने के एवज में इंजीनियर संतोष प्रसाद द्वारा सात हजार रुपया की रिश्वत मांगी जा रही थी. शिकायतकर्ता भीम कुमार राणा रिश्वत नहीं देना चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, दुमका से की.
एसीबी के सत्यापन में सही पाया गया आरोप:
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया। जांच के क्रम में यह बात पूरी तरह सच साबित हुई कि संतोष प्रसाद द्वारा फाइनल बिल पास करने के लिए भीम कुमार राणा से पांच हजार रुपया की रिश्वत मांगी जा रही है. आरोप की पुष्टि होने के बाद, एसीबी ने संतोष कुमार को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया.
