Ranchi: भारतीय कुम्हार महासंघ के बैनर तले बुधवार को सैकड़ों लोगों ने लोकभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर कुम्हार समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से कुम्हार समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सिकंदर प्रजापति, राजेंद्र प्रजापति, विशेश्वर महतो, तेजू प्रजापति, रामदेव प्रजापति, सुरेंद्र कुम्हार समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि कुम्हार समाज वर्षों से अत्याचार, शोषण, उपेक्षा और अधिकारों से वंचित होने की पीड़ा झेल रहा है. सदियों से अपनी मेहनत, कला और परंपरा के माध्यम से देश की संस्कृति को जीवित रखने वाला यह समाज आज आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ता जा रहा है. वक्ताओं ने कहा कि सरकारें समय-समय पर बड़े-बड़े वादे तो करती है, लेकिन कुम्हार समाज के विकास और उत्थान के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि कुम्हार समाज मिट्टी के दीपक, घड़ा, मटका, कुल्हड़, धार्मिक सामग्री सहित कई उपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर देश की संस्कृति और सभ्यता को मजबूत करने का कार्य करता आया है, इसके बावजूद समाज को अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल रही है.
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राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
महासंघ के पदाधिकारियों ने झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कुम्हारों के हित में मिट्टी कला बोर्ड का गठन किया गया था. हालांकि सरकार बदलने के बाद बोर्ड में पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई और आज भी कई महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हुए हैं. उन्होंने सरकार से बोर्ड को सक्रिय करने और रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई तो कुम्हार समाज राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा.
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