Ranchi: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस के नेता, मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर में अशांति का वातावरण बनाने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया. राज्यसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका से कांग्रेस बौखला गई है. इसी कारण उनके नेता और कार्यकर्ता निर्वाची पदाधिकारी पर अनावश्यक दबाव बनाने, हल्ला-हंगामा करने तथा संवैधानिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं. यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विरुद्ध है. वे बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे. उन्होंने कांग्रेस पर राज्यसभा चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया.
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कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को न लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास है और न ही संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा. विधानसभा के भीतर इस प्रकार का प्रदर्शन कर चुनावी प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करना अत्यंत गंभीर विषय है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करते हुए कहा कि जो लोग संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं, उनके विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. जब रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निर्धारित नियमों के तहत पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है, तब कांग्रेस द्वारा दबाव की राजनीति क्यों की जा रही है? कांग्रेस चुनाव आयोग एवं संवैधानिक संस्थाओं की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास क्यों कर रही है? विधानसभा अध्यक्ष स्वयं उनके गठबंधन से जुड़े हैं, फिर भी कांग्रेस नेताओं का यह व्यवहार दर्शाता है कि उन्हें अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं है.
खरीद-फरोख्त और दबाव की राजनीति कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि खरीद-फरोख्त और दबाव की राजनीति कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली रही है. झारखंड की जनता और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर कांग्रेस ने ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया है जिसका राज्य से कोई प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं रहा है. इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस झारखंड के स्वाभिमान और स्थानीय नेतृत्व की भावना का सम्मान नहीं करती. भाजपा को जैसे ही कांग्रेस द्वारा किए जा रहे इस व्यवहार की जानकारी मिली, पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया. पर प्रशासन ने भाजपा कार्यकर्ताओं को विधानसभा के बाहर रोक दिया, जबकि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता विधानसभा परिसर के भीतर मौजूद रहे. उन्होंने इसे प्रशासन का दोहरा मापदंड बताते हुए निष्पक्षता पर सवाल उठाया.
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प्रशासन को चेतावनी, भेदभावपूर्ण रवैया स्वीकार नहीं
प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि भेदभावपूर्ण रवैया स्वीकार नहीं किया जाएगा. प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कार्य करना चाहिए. राज्यसभा चुनाव को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से संपन्न कराना रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी है और उन्हें किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर नियमों के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए. भाजपा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार से चुनावी एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी.
