Lohardaga : लोहरदगा जिला के सेन्हा प्रखंड के सिठिओ गांव के रहने वाले रूपेश कुमार साहू ने 19 अप्रैल 2017 को सुकर पालन (Pig farming) शुरू किया था. प्रारंभिक खर्च के रूप में 6 लाख रुपए खर्च हुए थे. यह पैसा रूपेश ने लोगों से कर्ज लेकर जुटाया था. घर वाले उसके इस काम से नाराज थे. घर वालों ने तो यहां तक कह दिया था कि उसे घर में रहने की जरूरत नहीं है. वह कहीं और रहे, लेकिन रूपेश ने हिम्मत नहीं हारी. वह इससे पहले सूकर चरवाही का काम करता था. उसे पता था कि सूकर कितने दिन में तैयार हो जाते हैं. ऐसे में उसने इसी क्षेत्र में व्यापार करने का निश्चय किया था. लोगों से कर्ज लेने के बाद उसने महज 40 डिसमिल जमीन में यह काम शुरू किया. इसके लिए रांची से सूकर के 24 फीमेल, दो मेल और 50 छोटे बच्चे खरीद कर लाया था. धीरे-धीरे इससे व्यापार शुरू किया. सफलता मिलने लगी. आज स्थिति यह है कि उसके पास 800 सूकर हैं. वह दो सूकर फार्म का वह मालिक है और हर महीने सभी प्रकार के खर्च काट कर कम से कम 8 लाख रुपए की आमदनी होती है. रूपेश ने कई लोगों को रोजगार भी दे रखा है. अत्याधुनिक तरीके से सूकर पालन का व्यापार करते हैं. सालों भर यह रोजगार चलता रहता है. रूपेश की यह सफलता युवाओं को प्रेरित कर रही है. कई लोग उनसे सीखने आते हैं कि आखिर कैसे सूकर पालन किया जाता है.

7 महीने में एक क्विंटल से ज्यादा का हो जाता है वजन
लोहरदगा सूकर पालन की सबसे खास बात यह है कि इसमें काफी कम खर्च, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफा है. लोगों के मन में यह बात घर कर गई है कि सूकर पालन एक गंदा काम है. सच्चाई यह है कि इसमें लाखों, करोड़ों की कमाई है. बस काम करने का तरीका आना चाहिए. रूपेश बताते हैं कि एक शिशु सूकर 7 महीने में 1 क्विंटल से ज्यादा वजन का तैयार हो जाता है. वह अपने फार्म से असम, नागालैंड के अलावा सरकारी फॉर्म में और लोहरदगा जिला से 500 किलोमीटर की दूरी में स्थित व्यापारियों को सूकर बेचते हैं. एक शिशु सूकर का वजन 10 से 12 किलोग्राम का होता है. जबकि उसकी कीमत 6000 रुपये होती है. जबकि एक बड़ा और तैयार सूकर 90 से 90 किलोग्राम से लेकर 1 क्विंटल 20 किलोग्राम तक होता है और इसकी कीमत 26000 रुपए से लेकर 40000 रुपए तक होती है. उन्होंने यह काम सोशल मीडिया पर वीडियो देख-देख कर ही उन्होंने काम करने का तरीका सीखा है. रूपेश बताते हैं कि एक माता सूकर साल में दो बार प्रजनन करती है और 10 से 12 बच्चे देती है. बच्चे 40 दिन में मां से अलग हो जाते हैं. इसके बाद उन्हें बाजार में बेचा जाता है. व्यापारी खुद उनके पास आते हैं और खरीद कर ले जाते हैं. उनकी उम्र महज 26 साल है. उन्होंने महज मैट्रिक तक की ही पढ़ाई की है. लेकिन आज वह इस क्षेत्र में लगातार सफलता प्राप्त कर रहे हैं. उनके पास मारुति, स्कॉर्पियो, टाटा मैजिक, पिकअप, ऑटो सहित कई वाहन हैं. यह काम काफी बेहतर है और मुनाफे वाला है.

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