Vinit Abha Upadhyay
Ranchi : रिम्स की जमीन को रैयती भूमि बता कर खरीद बिक्री किये जाने के मामले की जांच एसीबी कर रही है. अब तक इस केस में राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. उक्त दोनों आरोपियों ने अपनी जामनत के लिए रांची एसीबी की विशेष कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. आरोपियों की बेल पर सुनवाई के दौरान एसीबी ने कोर्ट के समक्ष कई गंभीर खुलासे किये हैं. एजेंसी को अब तक की जांच में यह जानकारी मिली है कि राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण केस संख्या 01/68-69 के माध्यम से बनारसी दास अरोड़ा नामक व्यक्ति से रिम्स के लिए भूमि अधिग्रहित की थी और उन्हें इसका उचित मुआवजा भी दिया जा चुका था. उक्त भूमि बड़गाईं अंचल के मोरहाबादी मौजा में स्थित है. जिसका खाता नंबर 107, प्लॉट नंबर 1693 है. इस भूमि का कुल रकबा 93 डिसमिल है.

धोखाधड़ी कर बनायी पावर ऑफ अटॉर्नी
आरोपियों ने धोखाधड़ी से जो पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई थी, उसमें खाता संख्या 107, प्लॉट 1693 की जमीन के अलावा खाता संख्या 106, प्लॉट संख्या 1106 की 64 डिसमिल जमीन भी शामिल कर ली थी. इस भूमि की खतियानी रैयत मोसामात सहोदरी देवी (पति स्वर्गीय जगना बड़ाईक) थी. सहोदरी देवी के भतीजे गजाधर बड़ाईक ने वर्ष 1947 में डीड संख्या 4875 के जरिए यह जमीन अब्दुल गफ्फूर खान को बेची थी. जिसके बाद अब्दुल गफ्फूर खान ने डीड संख्या 1382 (दिनांक 06.02.1962) के माध्यम से यह पूरी 93 डिसमिल जमीन बनारसी दास अरोड़ा को बेच दी. बाद में इसी बनारसी दास अरोड़ा से सरकार ने रिम्स के लिए 60 डिसमिल जमीन ली थी.
जमीन को हड़पने के लिए दो स्तरों पर आपराधिक साजिश रची गई
काफी समय पहले सोनमैत देवी नाम की एक महिला ने खुद को खतियानी रैयत मोसामात सहोदरी देवी का वंशज (जीतू बड़ाईक की बेटी) बताते हुए जमीन बहाली के लिए SAR केस संख्या 139, 140/88-89 दर्ज कराया था. उसने दावा किया कि वह अनुसूचित जनजाति (चिक बड़ाइ्रक) समुदाय से है और उसकी जमीन पर झिरमणी देवी और अनंत शर्मा ने अवैध कब्जा कर रखा है. एसएआर कोर्ट ने सोनमैत देवी के दावे को खारिज कर दिया, क्योंकि वह न तो सहोदरी देवी से अपना रिश्ता साबित कर पाई और न ही अपना आदिवासी होना.
90 डिसमिल जमीन अंचल अधिकारी को सौंपा
हालांकि गैर-हाजिर रहने के कारण झिरमणी देवी आदि के खिलाफ एकतरफा आदेश देते हुए कोर्ट ने पूरी 90 डिसमिल जमीन का कब्जा अंचल अधिकारी को सौंप दिया और निर्देश दिया कि जब सहोदरी देवी के असली वंशज मिलें, तब उन्हें यह भूमि सौंपी जाए. इस एकतरफा आदेश को संशोधित कर झिरमणी देवी और अनंत शर्मा के पक्ष में 33 डिसमिल जमीन बहाल कर दी गई क्योंकि उन्होंने इसे बनारसी दास अरोड़ा से खरीदा था.
रजिस्टर में कराया हेरफेर
जांच में यह बात सामने आई कि सोनमैत देवी और उसके सहयोगियों ने रांची के तत्कालीन अंचल अधिकारी राजेश कुमार के साथ मिलीभगत कर रजिस्टर-प्प् में हेरफेर कराया. रजिस्टर-II में स्पष्ट दर्ज था कि यह सरकारी भूमि है फिर भी धोखाधड़ी से सोनमैत देवी का नाम वहां दर्ज करा दिया गया. उसके बाद राज किशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक और उनके दिवंगत भाई नंद किशोर बड़ाईक ने खुद को खतियानी रैयत सहोदरी देवी का वंशज और सोनमैत देवी को अपनी दादी बताकर फर्जी वंशावली तैयार कर ली. जाली वंशावली के आधार पर सोनू कुमार सरन नामक व्यक्ति के पक्ष में 1.06 एकड़ जमीन की जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी. सोनू कुमार सरन ने इस पावर का इस्तेमाल करते हुए जमीन अपनी ही पत्नी कुमारी पूजा सरन के नाम पर रजिस्ट्री कर दी.
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