Gumla: झारखंड का गुमला जिला भले ही विकास के कई पैमानों पर पिछड़ा माना जाता हो, लेकिन खेल के क्षेत्र में इस जिले ने राज्य और देश को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं. इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर झारखंड को नई पहचान दिलाई है. इसके बावजूद कई खिलाड़ियों को आज भी सम्मान और रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
अष्टम उरांव बनीं प्रेरणा
गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के एक सुदूर गांव से निकलकर राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अष्टम उरांव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फुटबॉल जगत में अलग पहचान बनाई है. उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश के लिए पदक जीते हैं और झारखंड का नाम रोशन किया है. बावजूद इसके उन्हें अब तक कोई स्थायी सरकारी नौकरी या विशेष सम्मान नहीं मिल सका है.

गुमला पहुंचने पर हुआ स्वागत
लंबे समय बाद जब अष्टम उरांव गुमला पहुंचीं तो स्थानीय खिलाड़ियों और कोच ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. स्वागत समारोह भले ही सादगीपूर्ण रहा, लेकिन उसमें मौजूद लोगों का सम्मान और स्नेह साफ दिखाई दिया. युवा खिलाड़ी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और उनके जैसा बनने का सपना देखते हैं.
संघर्ष और आर्थिक परेशानी
अष्टम उरांव ने बताया कि उन्होंने अंडर-17 फुटबॉल प्रतियोगिता और सैफ फुटबॉल टूर्नामेंट जैसे बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया है. सैफ टूर्नामेंट में भारत को सात साल बाद खिताब दिलाने वाली टीम का हिस्सा भी रहीं. उन्होंने कहा कि मैदान में देश के लिए खेलने का उत्साह हमेशा रहता है, लेकिन आर्थिक स्थिति आज भी चुनौती बनी हुई है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के बावजूद वह अपने माता-पिता को वह सुविधाएं नहीं दे पा रही हैं, जिनकी वे हकदार हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बचपन से ही कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
सरकारी नौकरी की मांग
अष्टम उरांव का कहना है कि यदि राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी की सुविधा मिले तो वे और अधिक उत्साह के साथ देश के लिए खेल सकेंगे. उनका कहना है कि खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतते हैं, लेकिन सफलता के बाद भी उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती.
कोच ने भी उठाई मांग
अष्टम उरांव की कोच बीना जी ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियां आगे बढ़ रही हैं. लेकिन खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रोजगार की व्यवस्था भी जरूरी है.
उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जाती है. इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं. झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए.
शिवानी टोप्पो ने भी रखी बात
राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी शिवानी टोप्पो ने कहा कि खिलाड़ी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ देश के लिए खेलते हैं और पदक जीतने का प्रयास करते हैं. लेकिन जब परिवार की जिम्मेदारियों की बात आती है तो उनके पास कोई स्थायी आर्थिक सहारा नहीं होता.
उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी मिले तो इससे न केवल उनका भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि अन्य युवा भी खेलों की ओर आकर्षित होंगे.
सरकार से उम्मीद
गुमला जैसे क्षेत्रों से लगातार प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकल रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं. खिलाड़ियों का मानना है कि सरकार यदि खेल प्रतिभाओं को सरकारी नौकरी से जोड़ने की ठोस नीति बनाए तो उनका भविष्य बेहतर हो सकता है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों के अधिक बच्चे खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगे.
सरकार से खिलाड़ियों की गुहार
खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि खेल सुविधाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए रोजगार की भी व्यवस्था की जाए. उनका कहना है कि इससे खिलाड़ियों और उनके परिवारों का जीवन बेहतर होगा और झारखंड खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगा.
