Hazaribagh:शहर के बड़ा अखाड़ा क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन मठ और उससे जुड़ी दान की जमीनों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. आयोजित एक प्रेस वार्ता में मठ के महंत बिजयानंद दास ने प्रशासनिक व्यवस्था और भूमि संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मठ और भगवान ठाकुर जी के नाम दान में मिली जमीनों पर अवैध कब्जे, अनियमित खरीद-बिक्री तथा दस्तावेजी गड़बड़ियों के कारण धार्मिक संस्था की संपत्ति खतरे में पड़ गई है. महंत ने कहा कि वर्षों पहले समाज के दानवीरों और श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर, मठ और भगवान ठाकुर जी की सेवा-पूजा के लिए कई एकड़ भूमि दान स्वरूप दी गई थी. इन जमीनों से होने वाली आय का उपयोग मंदिर के रखरखाव, पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाना था. लेकिन समय के साथ इन जमीनों पर कथित रूप से भू-माफियाओं की नजर पड़ गई और धीरे-धीरे जमीनों पर कब्जा, अवैध हस्तांतरण तथा खरीद-बिक्री के मामले सामने आने लगे.
2022 से न्याय की तलाश में भटक रहे सेवक
महंत बिजयानंद दास का दावा है कि मठ के सेवक और प्रतिनिधि वर्ष 2022 से लगातार न्यायालय, समाहरणालय, अंचल कार्यालय और अन्य प्रशासनिक संस्थानों के चक्कर लगा रहे हैं. कई आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद अब तक मामले का कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है. उन्होंने कहा कि न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी के कारण मठ से जुड़े लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है. उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच वर्षों से लंबित है, जिससे विवाद और जटिल होता जा रहा है.

भूमि रिकॉर्ड और दस्तावेजों में अनियमितता की आशंका
प्रेस वार्ता में महंत ने दावा किया कि भूमि अभिलेख, ऑनलाइन जमाबंदी, पावर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं की संभावना है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पर्याप्त सत्यापन के बिना दस्तावेजों का निष्पादन किया गया तथा विवादित परिस्थितियों में जमीन की रजिस्ट्री भी हुई है. हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन महंत का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है.
“भगवान ठाकुर जी को भी न्याय के लिए अदालत जाना पड़ेगा”
प्रेस वार्ता के दौरान महंत बिजयानंद दास भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और न्याय व्यवस्था से समय पर राहत नहीं मिली तो मठ के सेवक भगवान ठाकुर जी की प्रतिमा के साथ शांतिपूर्ण ढंग से न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे. उन्होंने कहा, “हम वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. यदि अब भी सुनवाई नहीं हुई तो भगवान ठाकुर जी को साक्षी मानकर न्याय की मांग करेंगे. यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और दानदाताओं की भावना की रक्षा का प्रश्न है.”
प्रशासन की भूमिका पर टिकी लोगों की नजर
यह मामला फिलहाल आरोपों और दावों के स्तर पर है तथा इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि धार्मिक संस्थाओं की दान की जमीनों से जुड़े विवादों का समय पर समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं. अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं. देखना यह होगा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है या फिर न्याय की यह पुकार भी सरकारी फाइलों और लंबी प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाती है.
