Hazaribagh: पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड में करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी बाबूडीह ईको पार्क परियोजना निर्माण शुरू होते ही विवादों के केंद्र में आ गई है. प्रखंड के जमुनिया डैम के निकट वन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी पार्क में कथित तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं. स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग तेज कर दी है.
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है. निर्माण स्थल पर इस्तेमाल किए जा रहे ईंट, बालू, सीमेंट और सरिया की गुणवत्ता को लेकर लोगों ने गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही मानकों की अनदेखी हुई तो करोड़ों की यह परियोजना भविष्य में टिकाऊ नहीं रह पाएगी. ग्रामीणों के अनुसार निर्माणाधीन परिसर की कई दीवारें पहली नजर में ही कमजोर दिखाई देती हैं. लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद आवश्यक क्योरिंग नहीं किया जा रहा है, जो किसी भी भवन या संरचना की मजबूती के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है.

विकास कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठे सवाल
निर्माण क्षेत्र के जानकारों के अनुसार क्योरिंग में लापरवाही बरतने से दीवारों और ढांचों में समय से पहले दरारें पड़ सकती हैं. इससे पूरी संरचना की आयु प्रभावित होती है और भविष्य में रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ जाता है. ऐसे में यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि परियोजना के मूल उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है. जब निर्माण स्थल पर मौजूद वन विभाग के कर्मियों से इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने विभागीय अनुमति के बिना कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इससे लोगों के बीच संदेह और गहरा गया है.
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जांच की मांग के बीच परियोजना के भविष्य पर टिकी निगाहें
जमुनिया डैम के मनोहारी प्राकृतिक परिवेश के बीच विकसित हो रहा बाबूडीह ईको पार्क क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान स्थापित करने की क्षमता रखता है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा. लेकिन निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल इन उम्मीदों पर ग्रहण लगाते दिखाई दे रहे हैं.
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, उपयोग में लाई जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच हो तथा किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाला पैसा जनता की गाढ़ी कमाई का है और उसकी एक-एक राशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए. विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.
पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की उम्मीदों से जुड़ी बाबूडीह ईको पार्क परियोजना फिलहाल निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा और विवाद का विषय बनी हुई है. क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि समय रहते आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू होने से पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो सकती है. अब सबकी निगाहें वन विभाग और संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इन गंभीर आरोपों को किस गंभीरता से लेते हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं.
