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हजारीबाग में गाय खरीद लोन योजना पर घोटाले के आरोप, जिला स्तर पर जांच की उठी मांग

Hazaribagh: जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित गाय खरीद ऋण एवं सरकारी सब्सिडी योजना पर गंभीर सवाल खड़े...

Hazaribagh: जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित गाय खरीद ऋण एवं सरकारी सब्सिडी योजना पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. कटकमसांडी प्रखंड से उठी शिकायतों ने अब जिला स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। ग्रामीणों ने योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता, फर्जीवाड़ा और वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि पशुपालन विभाग के कुछ कर्मियों, बैंक अधिकारियों तथा कथित गव्य विक्रेताओं बिचौलियों की मिलीभगत से वर्षों से योजना का दुरुपयोग किया जा रहा है.

घर-घर सत्यापन की मांग

आरोपों के अनुसार, लाभुकों के नाम पर बैंक ऋण स्वीकृत कराया जाता है, सरकारी सब्सिडी भी जारी कर दी जाती है, लेकिन कई मामलों में लाभुकों को वास्तविक रूप से गाय उपलब्ध ही नहीं कराई जाती. स्थानीय लोगों का दावा है कि कागजों पर गाय खरीद की प्रक्रिया पूरी दिखाकर ऋण और सब्सिडी राशि का कथित रूप से बंदरबांट कर लिया जाता है. यदि पूरे जिले में लाभुकों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं.

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जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को योजना से जुड़े सभी लाभुकों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए और घर-घर जाकर यह जांच करनी चाहिए कि जिनके नाम पर ऋण और सब्सिडी स्वीकृत हुई है, उनके पास वास्तव में गाय मौजूद है या नहीं. लोगों का आरोप है कि योजना का उद्देश्य पशुपालन को बढ़ावा देना था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है. ग्रामीणों के अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच कराई गई तो जिले में एक बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है. उनका कहना है कि कई ऐसे लाभुक मिल जाएंगे जिनके नाम पर ऋण और सब्सिडी का भुगतान हो चुका है, लेकिन उनके घरों में एक भी गाय नहीं मिलेगी.

जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्र के लोगों ने इस मामले पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया। ग्रामीणों ने उपायुक्त एवं संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.

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