Hazaribagh:नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या-23 स्थित कस्तूरी खाप के लबकी पोखर में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य जारी है. लेकिन कार्य प्रारंभ होने के करीब 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद योजना स्थल पर अब तक एस्टीमेट बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संवेदक, वार्ड पार्षद तथा नगर निगम के अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई. ऐसे में योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.
आखिर जनता से क्यों छिपाई जा रही योजना की जानकारी?
सरकारी योजनाओं में कार्यस्थल पर एस्टीमेट बोर्ड लगाना एक अनिवार्य प्रक्रिया मानी जाती है. इस बोर्ड पर योजना की लागत, कार्य का नाम, संवेदक का नाम, कार्य अवधि, तकनीकी स्वीकृति और संबंधित विभाग की जानकारी दर्ज रहती है, जिससे आम नागरिक योजना की निगरानी कर सकें. लेकिन लबकी पोखर में चल रहे इस महत्वाकांक्षी कार्य में एस्टीमेट बोर्ड नहीं लगाए जाने से लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो जनता को इसकी पूरी जानकारी मिलनी चाहिए.

अधिकारी बड़ा या संवेदक?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक नियमों का उल्लंघन करता है तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन जब सरकारी योजनाओं में ही नियमों की अनदेखी हो रही है तो जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? लोगों का सवाल है कि क्या संवेदक की मनमानी के आगे विभागीय अधिकारी बेबस हैं, या फिर नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? यदि अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गुणवत्ता को लेकर भी उठने लगे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एस्टीमेट बोर्ड नहीं होने के कारण यह पता नहीं चल पा रहा है कि योजना में कौन-कौन से कार्य प्रस्तावित हैं और किस मानक के अनुसार काम किया जाना है. इससे कार्य की गुणवत्ता की निगरानी भी प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल कार्यस्थल पर एस्टीमेट बोर्ड लगाया जाए और योजना से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं, ताकि जनता भी विकास कार्यों की निगरानी कर सके.
जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने तथा एस्टीमेट बोर्ड नहीं लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकारी धन से संचालित योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और करोड़ों रुपये की इस योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है.
चार फीट की जगह सिर्फ किनारे से मिट्टी काटने का खेल
योजना में बरती जा रही तकनीकी लापरवाही को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. ग्रामीण राहुल सिंह और रोहित सिंह ने कार्यस्थल पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस गहरीकरण योजना के तहत तालाब से पूरे चार फीट मिट्टी काटने का सरकारी प्रावधान तय किया गया है. लेकिन संवेदक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर केवल तालाब के किनारों से ही मिट्टी काटी जा रही है, ताकि यह दिखाया जा सके कि चार फीट की खुदाई पूरी कर ली गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार जानबूझकर इस महत्वपूर्ण कार्य में अत्यधिक देरी कर रहा है, ताकि जल्द ही बारिश का मौसम शुरू हो जाए और पानी भरने के बहाने मिट्टी कटाई का काम बीच में ही बंद कर दिया जाए. इसके अलावा, योजना में पहले तालाब के किनारे पर पत्थर लगाने का कड़ा प्रावधान था, जिसे बाद में बिना किसी ठोस वजह के बदल दिया गया. इस बदलाव से भविष्य में मिट्टी फिर से कटकर तालाब में समा जाएगी और परियोजना का पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पाएगा.
अभियंता ने जांच कर सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन
तालाब गहरीकरण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का मामला जैसे ही तूल पकड़ने लगा, विभागीय स्तर पर भी हलचल शुरू हो गई है. इस पूरे विषय पर नगर निगम के अभियंता रौशन कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि उन्हें इस कार्य के संबंध में स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बहुत जल्द स्वयं कार्यस्थल पर पहुंचेंगे. अभियंता ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए आश्वस्त किया कि यदि जांच के दौरान कार्यस्थल पर एस्टीमेट बोर्ड न होने या तकनीकी प्रावधानों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी और लापरवाही पाई जाती है, तो संवेदक को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही सही ढंग से कार्य करने के लिए बाध्य किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से अविलंब योजना संबंधी बोर्ड लगाने और कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई है.
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