हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं पर छात्रों का फूटा गुस्सा: हाथों में तिरंगा ले निकाला आक्रोश मार्च

Hazaribagh: प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त प्रशासनिक खामियों और अव्यवस्थाओं के खिलाफ शनिवार को विनोबा भावे...

Hazaribagh: प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त प्रशासनिक खामियों और अव्यवस्थाओं के खिलाफ शनिवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के छात्रों ने मोर्चा खोल दिया. अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता से नाराज सैकड़ों छात्रों ने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर एक कड़क आक्रोश मार्च निकाला. यह मार्च विभिन्न मार्गों से होते हुए सीधे अस्पताल परिसर पहुंचा, जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारी छात्रों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए सुगम और पारदर्शी बनाने की जोरदार वकालत की.

पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर निर्भरता बनी आफत: मोबाइल और इंटरनेट न होने पर थम जाती हैं स्वास्थ्य सेवाएं

छात्रों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम पर निर्भर कर दी गई हैं. आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले कई गरीब मरीजों या उनके परिजनों के पास या तो स्मार्टफोन नहीं होता, या कई बार उनका मोबाइल फोन बंद हो जाता है. ऐसी स्थिति में इंटरनेट सेवा उपलब्ध न होने या सर्वर डाउन रहने पर मरीजों के इलाज, पर्ची कटवाने और जांच संबंधी प्रक्रियाओं में भारी कठिनाई उत्पन्न हो जाती है. छात्रों ने मांग की कि डिजिटल के साथ-साथ पारंपरिक और वैकल्पिक व्यवस्था भी चुस्त-दुरुस्त रहनी चाहिए ताकि किसी की जान पर न बन आए.

काउंटरों पर छुट्टे पैसों का खेल: सौ का नोट देने पर मरीजों को दौड़ाता है अस्पताल प्रबंधन

धरने पर बैठे छात्रों ने अस्पताल के कैश काउंटरों पर होने वाली रोज-रोज की किल्लत को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि अस्पताल की भुगतान व्यवस्था आम लोगों को राहत देने के बजाय परेशान करने वाली बन चुकी है. काउंटरों पर अक्सर छुट्टे पैसों की कृत्रिम समस्या बनी रहती है. यदि कोई लाचार मरीज या उसका परिजन काउंटर पर 100 रुपये का नोट देता है, तो कर्मी छुट्टे पैसे की मांग करते हुए उन्हें बाहर भेज देते हैं. इस छोटी सी वजह से मरीजों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के परिजनों को अनावश्यक रूप से काउंटरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद होता है.

आम लोगों की उम्मीद का केंद्र हैं सरकारी अस्पताल: व्यवस्था नहीं सुधरी तो जारी रहेगा उग्र आंदोलन

प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि सरकारी अस्पताल समाज के सबसे गरीब और अंतिम पायदान के व्यक्ति की उम्मीद का मुख्य केंद्र होते हैं, इसलिए यहां आने वाले किसी भी नागरिक को तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए. छात्रों ने मांग की कि मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में तुरंत सुधार किया जाए, भुगतान काउंटरों की मनमानी रोकी जाए और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए. प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं ने साफ कहा कि जब तक अस्पताल प्रबंधन उनकी इन जनहित से जुड़ी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा.

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