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एक्सक्लूसिव: 2 सीटें, 3 चेहरे और हॉर्स ट्रेडिंग का साया; झारखंड राज्यसभा चुनाव में विधायकों के पीछे लगी खुफिया विभाग

जेएमएम और कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय की एंट्री से बिगड़ा गणित, खुफिया विभाग रख रहा पल-पल की रिपोर्ट Ranchi...

  • जेएमएम और कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय की एंट्री से बिगड़ा गणित, खुफिया विभाग रख रहा पल-पल की रिपोर्ट

Ranchi : झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव ने सूबे की सियासत में जबरदस्त उबाल ला दिया है. दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशियों के मैदान में डटे होने के कारण अब क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) की गंभीर आशंकाएं गहरा गई हैं. इस संभावित राजनीतिक ‘सेंधमारी’ को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बेहद गोपनीय कदम उठाया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खुफिया विभाग को पूरी तरह अलर्ट पर डाल दिया गया है. खुफिया विभाग के अधिकारियों को निर्देश है कि वे हर राजनीतिक दल के विधायकों, विशेषकर निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों की गतिविधियों पर ‘शैडो’ (गुप्त निगरानी) रखें. विधायकों के संपर्क, हालिया बैठकों और यहां तक कि संदिग्ध कॉल रूट्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है ताकि साल 2012 और 2010 जैसे बदनाम ‘कैश-फॉर-वोट’ कांड का इतिहास झारखंड में दोबारा न दोहराया जा सके.

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खेल क्यों फंसा? समझिए सीटों और वोटों का पूरा गणित

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल स्थिति बेहद दिलचस्प है. इस राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी प्रत्याशी को 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है.

सत्ताधारी गठबंधन

(जेएमएम+कांग्रेस+आरजेडी): गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत संख्या बल है. इस लिहाज से जेएमएम के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा, दोनों की जीत बिल्कुल पक्की दिखती है.

जाने ट्विस्ट कहां है?

विपक्षी गठबंधन (एनडीए) के पास अपने 24 विधायक हैं (बीजेपी के 21, आजसू, एजेपी-आरवी और जेडी-यू). यानी वे जीत के आंकड़े (28) से महज 4 वोट दूर हैं. इसी 4 वोटों की खाई को पाटने और सत्ताधारी खेमे में खलबली मचाने के लिए एक बड़े निर्दलीय चेहरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया गया है.

खुफिया विभाग की किन चीजों पर है नजर

– होटल और फार्महाउस: प्रमुख होटलों और रिसॉर्ट्स में आने-जाने वाले ‘विशिष्ट मेहमानों’ की गुप्त मॉनिटरिंग.

– फंडिंग रूट्स: चुनाव से ठीक पहले अचानक सक्रिय होने वाले बड़े कारोबारियों और सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन पर आर्थिक खुफिया विंग की नजर.

– नाराज विधायक: दोनों ही खेमों के वो विधायक जो हाल-फिलहाल में अपनी ही पार्टियों से किन्हीं कारणों से नाराज चल रहे हैं, उनकी सुरक्षा और संपर्क को स्कैन किया जा रहा है.

– पुराना इतिहास: झारखंड में राज्यसभा चुनाव और विवादों का चोली-दामन का साथ झारखंड का इतिहास रहा है कि जब भी राज्यसभा चुनाव में अतिरिक्त उम्मीदवार की एंट्री हुई है, तब-तब दिल्ली से लेकर रांची तक एजेंसियां दौड़ पड़ी हैं.

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जानिए चुनाव में कब कब हुआ था बड़ा कांड

2012 चुनाव के दिन ही रांची की सड़कों पर एक गाड़ी से 2.15 करोड़ रुपए कैश बरामद हुए थे. आरोप लगा कि यह पैसा विधायकों को बांटने के लिए लाया जा रहा था. चुनाव आयोग ने इतिहास में पहली बार पूरा राज्यसभा चुनाव ही रद्द कर दिया था. 2010 एक मीडिया स्टिंग में 6 विधायक सीधे तौर पर वोट के बदले नोट की बात करते कैमरे में कैद हो गए थे. झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने टेकओवर किया और विधायकों के घरों पर छापेमारी हुई थी.

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