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हजारीबाग : दाखिल-खारिज के लिये राजस्व उप निरीक्षक पर 5 लाख रुपये मांगने का आरोप, डीसी के आदेश पर जांच शुरू

Hazaribagh : जिला में जमीन के दाखिल-खारिज मामलों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के...

Hazaribagh : जिला में जमीन के दाखिल-खारिज मामलों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. कटकमदाग अंचल कार्यालय में पदस्थापित एक राजस्व उप निरीक्षक सचिन कुमार पर दाखिल-खारिज वाद को प्रभावित करने और इसके एवज में लाखों रुपये की मांग करने का गंभीर आरोप लगा है. मामले की शिकायत सीधे डीसी हजारीबाग तक पहुंचने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. डीसी कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार कटकमदाग थाना क्षेत्र के कटकमा निवासी नवीन कुमार सिंह ने उपायुक्त को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि कटकमदाग अंचल कार्यालय में कार्यरत राजस्व उप निरीक्षक सचिन कुमार ने दाखिल-खारिज वाद संख्या 3721/2025-26 को प्रभावित करने का प्रयास किया. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामले के निपटारे के नाम पर 5 लाख रुपये की मांग की गई. शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया.

आरोपों के समर्थन में साक्ष्य की मांग

डीसी के निर्देश पर अपर समाहर्ता, हजारीबाग ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर आरोपों के समर्थन में शपथ पत्र और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है. पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है. इसलिए निर्धारित तारीख पर उपस्थित होकर साक्ष्य उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

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जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है. शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद आरोपों की सत्यता की जांच होगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी या कर्मी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला सामने आने के बाद जिले में जमीन संबंधी कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आम लोगों का आरोप है कि कई अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज, लगान रसीद, भूमि सत्यापन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए दलालों और बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है. भूमि विवादों और म्यूटेशन मामलों में देरी के कारण लोगों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. कई मामलों में फाइलों को लंबित रखने, आपत्तियां लगाने और तकनीकी कारणों का हवाला देकर दबाव बनाने के आरोप भी लगते रहे हैं.
जिले के विभिन्न प्रखंडों के लोगों का कहना है कि दाखिल-खारिज प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए और लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग हो. लोगों का मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तो राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है.

 

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