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मानव क्षति पर अब 10 लाख का मुआवजा, तुरंत मिलेगा 1 लाख कैश और हर महीने 2,000 पेंशन
Ravi Bharti
Ranchi: हेमंत सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों के हित में दो बेहद संवेदनशील और दूरगामी फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यकर्मियों को महीने के बीच में होने वाली आकस्मिक वित्तीय दिक्कतों से बचाने के लिए ‘सैलरी एडवांस और फाइनेंशियल वेलनेस सूट’ के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है. इसके साथ ही, राज्य में जंगली जानवरों के हमले से होने वाले जान-माल के नुकसान की भरपाई और त्वरित राहत के लिए एक बेहद प्रभावी ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) तथा 10 लाख रुपये के ‘कॉर्पस फंड’ के गठन को मंजूरी दी गई है. वित्त विभाग और वन विभाग के इन प्रस्तावों को विधि विभाग की सहमति के बाद कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है, जिससे अब कर्मचारियों को बिचौलियों और ऊंचे ब्याज वाले कर्जदाताओं से मुक्ति मिलेगी, वहीं वन्यजीवों के हमले से पीड़ित परिवारों को प्रशासनिक लेटलतीफी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘फाइनेंशियल वेलनेस सूट’ और ‘सैलरी एडवांस’ योजना
राज्य के सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के पहले सप्ताह में वेतन मिल जाता है, लेकिन कई बार महीने के बीच में अचानक बीमारी, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन कारणों से अतिरिक्त पैसों की जरूरत पड़ जाती है. त्वरित विकल्प न होने के कारण कर्मियों को ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था. इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार नॉन बैंकिंग फाइनांशियल कंपनिज के माध्यम से एक सुरक्षित और डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने जा रही है.
क्या है इस योजना की खासियत?
• सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं (शून्य लागत मॉडल): यह पूरा सिस्टम पूरी तरह शून्य लागत (Zero Cost) पर संचालित होगा. सरकार पर इसकी कोई वित्तीय देनदारी या लायबिलिटी नहीं होगी. यदि कोई कर्मचारी राशि नहीं चुका पाता है, तो वह पूरा क्रेडिट रिस्क और नुकसान सिर्फ संबंधित NBFC वहन करेगी.
• 30 दिनों का मुफ्त ‘सैलरी एडवांस’: कर्मचारी अपनी तत्काल जरूरतों के लिए 30 दिनों तक का वेतन एडवांस निकाल सकते हैं. यदि यह राशि उसी वेतन चक्र के भीतर वापस आ जाती है, तो कर्मचारी से कोई ब्याज, प्रोसेसिंग फीस या हिडन चार्ज नहीं लिया जाएगा. यह पूरी तरह मुफ़्त होगा.
• दीर्घकालिक ऋण सुविधा (2 से 60 महीने): बड़े या नियोजित खर्चों के लिए कर्मचारी अपनी मासिक आय का अधिकतम 30 गुना तक एडवांस ले सकते हैं, जिसे 2 से 60 महीनों की आसान ईएमआई में चुकाया जा सकेगा. यह ईएमआई सीधे वेतन से ऑटो-डेबिट हो जाएगी.
• 100% वित्तीय समावेशन और सुरक्षा कवच: राज्य के सभी कर्मचारी इस सुविधा के पात्र होंगे. हालांकि, जिम्मेदारी पूर्वक ऋण सुनिश्चित करने के लिए ईएमआई की अधिकतम सीमा कर्मचारी के शुद्ध वेतन (Net Salary) के 50% तक ही सीमित रखी जाएगी.
• पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण: यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल होगा और आरबीआई (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत काम करेगा. इसमें बीमा योजनाएं और बचत उपकरण जैसी अन्य मूल्यवर्धित सेवाएं भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी.
• एजेंसी का चयन पारदर्शी निविदा से: इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ‘गैर-अनन्य साझेदारी मॉडल’ अपनाएगी, जिसके तहत निविदा के माध्यम से प्रतिष्ठित एजेंसियों का चयन किया जाएगा. इसका प्रारूप विधि विभाग से स्वीकृत है.
जंगली जानवरों के हमले में मुआवजे के लिए नई एसओपी : अब पीड़ितों को नहीं काटना होगा दफ्तरों का चक्कर
राज्य के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले से होने वाली मानव क्षति पर त्वरित और पारदर्शी सहायता पहुंचाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी एसओपी निर्धारित की है. अब लालफीताशाही को खत्म करते हुए समय-सीमा के भीतर सीधे पीड़ित परिवार को मदद पहुंचाई जाएगी.
मानव मृत्यु या घायल होने पर मुआवजे की नई कार्यप्रणाली
• तत्काल 1,00,000 रुपए नगद सहायता: किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर रूप से घायल होने पर स्थानीय ग्राम मुखिया, मानकी या मुंडा के सत्यापन के तुरंत बाद 1,00,000 की नकद राशि पीड़ित परिवार को दे दी जाएगी. इसके लिए किसी अन्य सरकारी कागजात या औपचारिकता की आवश्यकता नहीं होगी. मुखिया की अनुपस्थिति में पंचायत सचिव और शहरी क्षेत्रों में वार्ड पार्षद यह सत्यापन करेंगे.
• पोस्टमार्टम के बाद 4,00,000 लाख का चेक: पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त होने पर अगले 4 लाख का भुगतान चेक या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से किया जाएगा.
• 6 लाख का फिक्स्ड डिपॉजिट और 2,000 मासिक पेंशन: शेष 5,00,000 लाख की मुआवजा राशि मृतक के आश्रित के नाम पर 5 वर्षों के लिए सावधि जमा के रूप में रखी जाएगी. इसके साथ ही, आश्रित को 3 वर्ष तक प्रति माह 2,000 रुपए की मासिक पेंशन दी जाएगी, जो घटना के 10 कार्य दिवस के भीतर स्वीकृत होगी.
• रेस्क्यू टीम भी होगी हकदार: वन्यजीवों को पकड़ने या रेस्क्यू करने के दौरान यदि रेस्क्यू टीम का कोई सदस्य घायल या मृत होता है, तो उसे भी इस पूरी व्यवस्था का लाभ मिलेगा.
अधिकारियों के लिए सख्त समय-सीमा तय
• 6 घंटे के भीतर: घटना के 6 घंटे के भीतर संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) को घटनास्थल पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करनी होगी.
• 24 घंटे के भीतर: सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर स्थानीय पुलिस थाना को सन्हा या प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर वन क्षेत्र पदाधिकारी को देनी होगी.
• 3 दिन के भीतर: वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा घटना के 3 दिनों के भीतर मुआवजे की स्वीकृति का आदेश निर्गत करना अनिवार्य होगा.
• 5 दिन के भीतर: सिविल सर्जन को अधिकतम 5 दिनों के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट वन विभाग को सौंपनी होगी.
त्वरित भुगतान के लिए ₹10 लाख का ‘कॉर्पस फंड’ स्वीकृत
मुआवजे के भुगतान में बजट या फंड की कमी आड़े न आए, इसके लिए कैबिनेट ने एक बेहद व्यावहारिक कदम उठाया है. प्रत्येक प्रादेशिक और वन्यप्राणी वन प्रमंडल को आकस्मिक खर्चों के लिए दस लाख रुपए का एक कॉरपस फंड आवंटित किया जाएगा. इस कॉर्पस फंड से तत्काल 1,00,000 लाख की अग्रिम सहायता बिना किसी देरी के जारी की जाएगी. यदि किसी प्रमंडल में यह राशि कम पड़ती है, तो क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक को यह अधिकार (शक्ति प्रत्यायोजन) दिया गया है कि वे अपने क्षेत्राधीन दूसरे वन प्रमंडलों से राशि ट्रांसफर करा सकें, जिसे बाद में मुख्य आवंटन मिलने पर वापस समायोजित कर दिया जाएगा.
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कैबिनेट के अन्य फैसले
• पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख मुरारी भगत को वेतन एवं अन्य लाभ की स्वीकृति
• पोखरिया मोड़ से गोविंदपुर सड़क के लिए पूर्वीं टूंडी में 5.84 एकड़ भूमि क्षतिपूरक वन रोपण के लिए वन विभाग को हस्तांतरित
• गोड्डा समाहरणालय में कार्यरत पांच कर्मियों की सेवा नियमितिकरण की स्वीकृति
• पर्वतपुर कोल ब्लॉक के लिए (चंदनक्यारी) के लिए 880 हेक्टेयर पर खनन पट्टा की स्वीकृति
• मिशन शक्ति संबल के तहत महिला हेल्पलाइन 1818 के निर्बाध कार्यशीलता के लिए एंजेंसी को अवधि विस्तार
• अमानत बराज योजना के क्रियान्वयन के लिए 947 करोड़ 26 लाख 71 हजार की स्वीकृति
• प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के कैग प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की स्वीकृति
• राज्य वित्त प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की स्वीकृति
• बोकारो समाहरणालय के दो कर्मियों के सेवा नियमितिकरण की स्वीकृति
• बांध सुरक्षा अधिनियम के तहत वृहद और मध्यम सिंचाई योजना के लिए विशेषज्ञों के पैनल गठन की स्वीकृति
• वन विभाग के कार्यों के लिए हाईब्रिड मॉडल को अंगीकृत करने की स्वीकृति
• महाधिवक्ता की नियुक्ति की घटनोत्तर स्वीकृति
• चंदनक्यारी में स्थित सीतानाला कोल ब्लॉक के लिए 792.56 एकड़ में खनन पट्टा की स्वीकृति
• पूर्वी सिंहभूम में खनिज ब्लॉक के 24.47 वर्ग किलोमीटर को आरक्षित करने के लिए केंद्र का अनुमोदन प्राप्त करने की स्वीकृति
• गोड्डा के सुंदर पहाड़ी स्थित जितपुर कोल ब्लॉक के लिए 497.1 हेक्टेयर में खनन पट्टा की स्वीकृति
• जेएसएससी द्वारा अनुशंसित मोटरयान निरीक्षक के पद पर नियुक्ति प्रदान करने की स्वीकृति



