Palamu : पांकी थाना में युवक महफूज अहमद के हिरासत में मौत मामले और मेडिकल जांच के फिट फॉर कस्टडी बताये जाने मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने लातेहार और पलामू प्रधान जिला न्यायाधीश को आदेश दिया है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच मजिस्ट्रेट की अगुवाई में कराई जाये. अदालत ने इस पूरे मामले में अपने आदेश में लापरवाही और फिर लीपापोती का जिक्र किया है. यह मामला प्रार्थी शाईदा खातून और अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल और अधिवक्ता आयुष राज ने अदालत में पक्ष रखा.
घायल होने के बाद भी बताया फिट फॉर कस्टडी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिरासत में युवक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और बाद में मामले को दबाने की कोशिश की गई. हाईकोर्ट ने लगातार मामले की निगरानी की. साथ ही मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा.जानकारी के अनुसार एक मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार क्षेत्र से पुलिस पकड़कर ले गई थी. आरोप है कि हिरासत में उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई. बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना में कांड संख्या 25/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. उसे सीजेएम कोर्ट पलामू में पेश किया गया. इसके बाद पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिस ने अदालत में अस्पताल का एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था. जिसमे घायल होने के बावजूद युवक को “फिट फॉर कस्टडी” बताया गया था. इस पर भी अदालत ने संज्ञान लेकर सीजेएम पर सवाल उठाए थे.
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