Newswave Desk: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें भगवान परशुराम के रूप में प्रदर्शित किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी की तस्वीर को परशुराम स्वरूप में दिखाया गया, जिसमें उनके हाथ में फरसा और संविधान की प्रति दिखाई गई.
भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी राजनीतिक नेता की तुलना भगवान परशुराम से करना हिंदू आस्था और धर्म का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया है. जानकारी के अनुसार वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दर्शाते हुए पोस्टर लगाए गए. कुछ स्थानों पर उनके चित्र का प्रतीकात्मक अभिषेक भी किया गया और समर्थकों ने इसे उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका बताया.
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई. एक पक्ष ने इसे राजनीतिक व्यक्तित्व के प्रति अति-उत्साह बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने धार्मिक प्रतीकों को राजनीति से जोड़ने पर सवाल उठाए. भगवान परशुराम हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं. उन्हें शौर्य, धर्म रक्षा और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है. ऐसे में किसी समकालीन राजनीतिक नेता की उनकी छवि से तुलना को लेकर विवाद खड़ा होना स्वाभाविक माना जा रहा है.
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. भाजपा नेताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय बताया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.
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