Ranchi: झारखंड के राज्यसभा चुनाव में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद महागठबंधन के उम्मीदवार की हार ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है. शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने 56 विधायकों के समर्थन के दावे के बीच मिली इस चौंकाने वाली शिकस्त के बाद कांग्रेस और गठबंधन के नेताओं ने भीतरघात की आशंका जताते हुए कड़ी समीक्षा की मांग की है. कांग्रेस ने जहां इस हार के पीछे ‘भाजपा के थैलीशाहों’ के खेल को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं गठबंधन की एकजुटता का दावा करते हुए स्पष्ट किया है कि वे भाजपा के फूट डालो वाले मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे.
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56 विधायकों का समर्थन, फिर कैसे हुई हार?
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव नतीजों पर कड़ी हैरानी जताते हुए कहा कि महागठबंधन के पास 56 विधायकों का स्पष्ट और मजबूत आंकड़ा था. इस संख्या बल के आधार पर गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित होनी चाहिए थी. पार्टी ने दावा किया है कि कांग्रेस के एक-एक विधायक ने पूरी वफादारी के साथ पार्टी उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया है. पूरा वोट रहते हुए भी हार का सामना कैसे करना पड़ा, यह एक गंभीर सवाल है. कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन के भीतर भ्रम पैदा करके और दलों को आपस में लड़ाकर फायदा उठाना चाहती है.
‘गठबंधन के लिए विष भी पीना पड़े, तो पी लेंगे’
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर सूबे के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने गठबंधन को अटूट बताते हुए कहा कि अगर हमें विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, लेकिन इस पुराने गठबंधन के अस्तित्व पर कोई आंच नहीं आने देंगे. उन्होंने साफ संदेश दिया कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है, हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसे नाजुक वक्त में अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि हार की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और राजद को भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.
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‘सीएम करेंगे समीक्षा’
कांग्रेस और गठबंधन के नेताओं ने भाजपा पर करारा तंज कसते हुए कहा कि महज एक राज्यसभा चुनाव जीत लेने से भाजपा यह न समझे कि पूरे झारखंड की राजनीति उसकी मुट्ठी में आ गई है. नेताओं ने इस जीत को भाजपा द्वारा मात्र एक वर्गफुट जमीन’ लेने जैसा बताया और दावा किया कि पूरे झारखंड की राजनीति आज भी महागठबंधन के पास है और आगे भी रहेगी. नेताओं ने सीधा आरोप लगाया कि चुनाव में भाजपा के थैलीशाहों’ ने धनबल का खेल खेला है, जिससे गठबंधन के उम्मीदवार के साथ बड़ा धोखा हुआ. मुख्यमंत्री ने भी इस पूरे प्रकरण पर कड़ा संज्ञान लिया है और स्पष्ट किया है कि इस अप्रत्याशित हार की गहन समीक्षा की जाएगी. गठबंधन के नेताओं ने माना है कि इस धोखे के बाद अब सभी सहयोगी दलों को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचना होगा.


