Ranchi: झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है. शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने अपनी ही सरकार के सहयोगियों और विपक्ष भाजपा को आड़े हाथों लिया. कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस प्रभारी और विधायकों पर लग रहे आरोप पूरी तरह निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण हैं. पार्टी ने दावा किया कि उनके सभी विधायकों ने पूरी एकजुटता और अनुशासन के साथ महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है.
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झारखंडी अस्मिता का सौदा
कांग्रेस ने चुनाव के गणित को सामने रखते हुए सीधे तौर पर क्रॉस वोटिंग और पैसे के खेल का आरोप लगाया. कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर पैसे का खेल नहीं हुआ, तो महागठबंधन के 56 वोटों में से 6 वोट कहां चले गए? भाजपा और उसके सहयोगियों के पास महज 24 वोट थे, तो उनके पास अतिरिक्त 6 वोट कहां से आए? जाहिर है, यहां धोखा और विश्वासघात हुआ है. कांग्रेस का मानना है कि यह धोखा सिर्फ उम्मीदवार के साथ नहीं, बल्कि महागठबंधन के मुखिया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हुआ है, जिन्होंने चुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी.

भाजपा ने सूटकेस-राजनीति को फिर से जिंदा किया
भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए निशाना साधते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत खोने वाली भाजपा ने इस चुनाव में अपनी प्रचलित ‘सूटकेस-राजनीति’ को फिर से जिंदा किया है. कांग्रेस ने तंज कसा कि भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर उन्हें झारखंड का कोई स्थानीय नेता या कार्यकर्ता उम्मीदवार के रूप में क्यों नहीं मिला? क्यों उन्हें किसी बाहरी ‘धनवानी जी’ को प्रत्याशी बनाकर झारखंडी अस्मिता की बोली लगानी पड़ी?
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सार्वजनिक बयानबाजी बंद हो, सीएम करें दोषियों पर कार्रवाई
कांग्रेस ने अपने सहयोगियों को नसीहत दी है कि वे सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बचें. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे मामले पर सहयोगियों से बात कर रहा है और स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे इस पूरे ‘वोट कांड’ की आंतरिक जांच करवाएंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे. यह समय आपसी लड़ाई का नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर आत्ममंथन करने का है.



