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जामताड़ा: प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से जारी अवैध बालू खनन, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल

Jamtara: नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश तथा केंद्र सरकार की सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन के तहत जामताड़ा जिला प्रशासन ने 10...

Jamtara: नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश तथा केंद्र सरकार की सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन के तहत जामताड़ा जिला प्रशासन ने 10 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक जिले के सभी नदी बालू घाटों से बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है. इस संबंध में उपायुक्त आलोक कुमार ने अनुमंडल पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी एवं सभी अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए अवैध बालू खनन और परिवहन पर सख्त निगरानी तथा प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा था. हालांकि जमीनी स्थिति प्रशासनिक आदेशों के विपरीत नजर आ रही है. नाला थाना क्षेत्र के पथरघाटा घाट में दुर्गा मंदिर के समीप भारी मात्रा में बालू खुलेआम भंडारित कर बिक्री के लिए रखा गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद यहां बालू का अवैध कारोबार लगातार जारी है.

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बड़े-बड़े मशीनों से बालू का अवैध खनन, माफिया के हौसले बुलंद

वहीं बंखेत घाट की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार यहां बड़े-बड़े मशीनों की मदद से लगातार बालू का अवैध खनन किया जा रहा है. निकाली गई बालू को हाइवा, डंपर और ट्रैक्टर के माध्यम से पश्चिम बंगाल सीमा तक पहुंचाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि बंखेत घाट सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित होने के कारण बंगाल की ओर से सक्रिय बालू माफिया झारखंड सीमा में प्रवेश कर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होने के बावजूद यह गतिविधियां आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रही हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों की निष्क्रियता और प्रभावी निगरानी के अभाव में बालू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं. सरकारी आदेश और निर्देश केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं, जबकि धरातल पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.

डीसी ने कहा- होगी सख्त कार्रवाई

इस पूरे मामले पर उपायुक्त आलोक कुमार ने कहा है कि अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी केवल आदेशों और बयानों तक ही सीमित रह जाता है.

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