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पीड़ित ने जो तस्वीरें सौंपी, जांच में वे सीआईडी के कर्मी नहीं निकले, पुलिस के नाम पर अवैध वसूली करने वाले गिरोह की तलाश तेज
Ranchi: पुलिस के नाम पर डरा-धमकाकर अवैध वसूली करने वाले एक बड़े रैकेट का सनसनीखेज मामला सामने आया है. रांची के देवी नगर हेसाग (रोड नंबर 1सी) के रहने वाले अरुण कुमार महतो को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर दो अज्ञात लोगो ने आईजी कार्यालय का कर्मचारी बताकर एक लाख रुपये की मांग की. इस मामले में पीड़ित ने लिखित शिकायत सीआईडी के एडीजी से की है, जिसके बाद महकमे में हड़कंप मच गया है. पीड़ित अरुण कुमार महतो ने हिम्मत दिखाते हुए वसूली करने आए दोनों संदिग्धों की तस्वीरें और वीडियो फुटेज अपने पास सुरक्षित रख ली थी. जब वे इन तस्वीरों को लेकर सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचे, तो वहां उनकी पहचान कराई गई. सीआईडी मुख्यालय में मिलान करने पर पता चला कि तस्वीरों में दिख रहे दोनों व्यक्ति सीआईडी या आईजी कार्यालय के कर्मचारी है ही नहीं. वे पुलिस की धौंस दिखाकर वसूली करने वाले कौन लोग थे अब इसकी जांच शुरू हो गई है.
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शाम को जांच करने आए एसआई, रात में पहुंचे पैसे मांगने वाले
दिए गए आवेदन के मुताबिक, शोणित बरन राय द्वारा एसटी, एससी थाने में दर्ज कराए गए एक मामले की जांच के लिए 20 जून की शाम को सब-इंस्पेक्टर महेन्द्र बड़ा पीड़ित की दुकान पर पहुंचे थे. उनके साथ ही दोपहिया वाहन से दो अन्य व्यक्ति भी आए, जिन्होंने खुद को आईजी कार्यालय का स्टाफ बताया. उस वक्त तो वे कागजात देखकर चले गए, लेकिन रात करीब 8 बजे वे दोनों दोबारा पीड़ित की दुकान पर धमकाने पहुंचे. उन्होंने कहा, अब तो तुम्हें मालूम चल ही गया होगा कि मैं आईजी ऑफिस का हूं. मुझे आईजी साहब ने केस की जांच के लिए भेजा है. एक लाख रुपये दो, नहीं तो जिंदगी बर्बाद कर देंगे.
सीआईडी ने शुरू की जांच, दोनों फर्जी पुलिसकर्मियों की खोज जारी
पुलिस के नाम पर सरेआम पैसे मांगे जाने के इस गंभीर मामले को सीआईडी ने बेहद संजीदगी से लिया है. सीआईडी अब खुद इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पुलिस की आड़ में वसूली का खेल खेलने वाले ये दोनों शातिर लोग कौन हैं. पीड़ित ने अपनी और अपने परिवार की जान-माल की रक्षा की गुहार लगाते हुए उनपर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.


