रिश्वत और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र विवाद में घिरे BDO, पुतला दहन कर कार्रवाई की मांग 

चतरा: झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड...

चतरा: झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अभिषेक पांडेय पर मनरेगा, पेंशन और 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों के विरोध में कांग्रेस युवा नेता मोती पासवान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रतापपुर चौक पर बीडीओ का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया.

मनरेगा डिमांड के लिए रिश्वत लेने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मनरेगा योजना के तहत काम की डिमांड डालने के लिए लोगों से पैसे की मांग की जाती है. उनका कहना है कि प्रत्येक आवेदन के बदले करीब दो हजार रुपये तक रिश्वत ली जा रही है. प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस तरह की घूसखोरी के कारण गरीब और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

कांग्रेस नेता ने उठाए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस युवा नेता मोती पासवान ने कहा कि प्रखंड में अफसरशाही और भ्रष्टाचार चरम पर है. इसी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन कर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पदाधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.

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कार्रवाई नहीं हुई तो तेज होगा आंदोलन

मोती पासवान ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को प्रखंड से जिला और राज्य स्तर तक तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले से विभागीय मंत्री को भी अवगत कराया जाएगा, ताकि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके.

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला पहले भी उठा था

उन्होंने यह भी कहा कि प्रखंड विकास पदाधिकारी के खिलाफ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला पहले भी सामने आ चुका है. इस मुद्दे को स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान ने विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो आज भ्रष्टाचार के ऐसे आरोप सामने नहीं आते.

बीडीओ का पक्ष नहीं मिल सका

हालांकि इस पूरे मामले को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिषेक पांडेय से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे. फोन के माध्यम से भी उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया. फिलहाल इस मामले में बीडीओ की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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