Ajay Dayal
Ranchi: झारखंड में अग्नि सुरक्षा के नाम पर एक बड़ा वैधानिक शून्य पैदा हो गया है. राज्य में वर्तमान में अग्निशमन सेवा की अपनी कोई नियमावली नहीं है, जिसके कारण विभाग पूरी तरह से दंतविहीन नजर आ रहा है.
बाध्य करने की नहीं शक्ति
आलम यह है कि अग्निशमन विभाग किसी भी बड़े होटल, मॉल, अस्पताल या अपार्टमेंट को अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं कर सकता.
पुराने अधिनियमों के सहारे संचालन
वर्तमान में विभाग केवल वर्ष 2007 और 2024 के अग्निशमन सेवा अधिनियमों के सहारे संचालित हो रहा है, लेकिन ठोस नियमावली के अभाव में इसे जमीन पर लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
NOC अब स्वैच्छिक
राज्य के स्टेट फायर ऑफिसर जितेंद्र तिवारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक विभाग के पास अपनी नियमावली नहीं है, तब तक एनओसी लेना पूरी तरह से भवन मालिकों की इच्छा पर निर्भर करता है.
अधिकार का अभाव
विभाग का कोई भी अधिकारी किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में जाकर भौतिक सत्यापन करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है, क्योंकि कानूनन उनके पास इसके लिए अधिकार प्राप्त पदाधिकारी ही नहीं हैं. यदि कोई संचालक कागजी अधिकार की मांग कर दे, तो विभाग के पास कोई जवाब नहीं होगा.
2026 तक नियमावली की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, अग्निशमन सेवा नियमावली तैयार की जा रही है और इसके वर्ष 2026 तक बनकर तैयार होने की संभावना है.
तब तक खतरा बरकरार
जब तक यह लागू नहीं होती, तब तक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर न तो जुर्माना लगाया जा सकता है और न ही उन्हें एनओसी के लिए मजबूर किया जा सकता है. नियमावली आने के बाद ही कड़े नियम और शर्तें लागू होंगी.
मौजूदा प्रावधान क्या कहते हैं
• अनिवार्यता: 15 मीटर से ऊंची इमारतों, स्कूलों, अस्पतालों और मॉल के लिए फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी बताया गया है.
• सुरक्षा उपकरण: हर बड़ी इमारत में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास, हूटर और फायर सेफ्टी प्लान होना चाहिए.
• जुर्माना: नियमों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना और जेल या सील करने तक का प्रावधान है.
केस स्टडी-1
18 फरवरी 2026 को कांके रोड स्थित ऋद्धिमान अपार्टमेंट के एक फ्लैट में भीषण आग लग गई. शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. गनीमत रही कि अपार्टमेंट के फायर फाइटिंग सिस्टम ने शुरुआती मदद की और फिर चार दमकल वाहनों ने आग पर काबू पाया.
केस स्टडी-2
कोकर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अश्वनी स्टील में भी शॉर्ट सर्किट से आग लगने के कारण अफरा-तफरी मच गई. धुएं के गुबार दूर-दूर तक देखे गए, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बुझाया.
स्टेट फायर अफसर का बयान
स्टेट फायर अफसर जितेंद्र तिवारी के अनुसार अग्निशमन विभाग फिलहाल किसी को एनओसी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. यह पूरी तरह संचालकों की इच्छा पर है. नियमावली बनने और लागू होने के बाद ही सख्त शर्तें और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी.
