News wave desk : शरीर का हर तरह का फैट नुकसानदायक नहीं होता है, मुख्य रूप से फैट दो प्रकार के होते हैं: व्हाइट (White) और ब्राउन (Brown)। व्हाइट फैट ऊर्जा जमा करता है और अधिकता में मोटापे व बीमारियों का कारण बनता है, जबकि ब्राउन फैट शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और कैलोरी जलाने में मदद करता है, जो फायदेमंद है, शरीर में जमा फैट को लेकर आम धारणा यही है कि यह सिर्फ मोटापा बीमारियों की वजह बनता है, लेकिन सच्चाई इससे अलग है, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों के अनुसार, फैट सिर्फ ऊर्जा का भंडार नहीं बल्कि शरीर का एक सक्रिय हिस्सा है, जो हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है.
फैट कहां जमा होता है, यही तय करता है खतरा
University of Glasgow की स्टडी के अनुसार, शरीर में फैट का वितरण (Fat Distribution) स्वास्थ्य जोखिम निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, शोध से पता चलता है कि भारतीयों और यूरोपियन लोगों में फैट जमा होने के तरीके में काफी अंतर है, जो बीमारियों के अलग-अलग जोखिम पैदा करता है, सभी लोगों में फैट एक जैसा जमा नहीं होता, यूरोपियन लोगों में यह त्वचा के नीचे रहता है, जबकि भारतीयों में यह अक्सर अंदरूनी अंगों के आसपास जमा हो जाता है, इस तरह के फैट को विसरल फैट कहा जाता है, जो ज्यादा खतरनाक माना जाता है.
क्यों ज्यादा जोखिम में होते हैं भारतीय?
एक्सपर्ट और विशेषज्ञों का मानना हैं कि भारतीयों के शरीर में त्वचा के नीचे फैट जमा करने की क्षमता कम होती है, ऐसे में अतिरिक्त फैट शरीर के अंदर जाकर जमा हो जाता है, जिससे डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.
दो तरह का होता है फैट
व्हाइट फैट: ऊर्जा जमा कर वजन बढ़ाता है.
ब्राउन फैट: कैलोरी जलाकर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है.
क्या बदल सकता है फैट का प्रकार?
हां वैज्ञानिक अब इस पर काम कर रहे हैं कि व्हाइट फैट को ब्राउन फैट में बदला जा सके, कुछ रिसर्च के अनुसार, मिर्च और काली मिर्च जैसे फूड्स इसमें मददगार हो सकते हैं, लेकिन यह अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है.
सिर्फ मात्रा नहीं, क्वालिटी भी मायने रखती है
हेल्दी फैट—जैसे नट्स और ऑलिव ऑयल—शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं.
जबकि खराब फैट शरीर में सूजन बढ़ाकर बीमारियों का कारण बन सकता है.
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