Click Here
Click Here
Click Here

हजारीबाग में कोयला लदे भारी वाहनों का आतंक; शहर के बीचों-बीच प्रदूषण और हादसों से जनता त्रस्त, बड़े आंदोलन की चेतावनी

Hazaribagh: हजारीबाग शहर के बीचों-बीच स्थित घनी आबादी वाले इलाकों में रात के अंधेरे में बेपरवाह दौड़ते कोयले से लदे भारी वाहनों...

Hazaribagh: हजारीबाग शहर के बीचों-बीच स्थित घनी आबादी वाले इलाकों में रात के अंधेरे में बेपरवाह दौड़ते कोयले से लदे भारी वाहनों ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. शहर के खिरगांव, लेपो रोड और डॉक्टर जाकिर हुसैन रोड जैसे प्रमुख रिहाइशी इलाकों से हर रात गुजरने वाली सैकड़ों बड़ी-बड़ी गाड़ियों के कारण पूरा क्षेत्र गंभीर प्रदूषण और हादसों के साये में जीने को मजबूर है. स्थिति इस कदर भयावह हो चुकी है कि स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है.समाजसेवियों और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने इन भारी वाहनों के प्रवेश पर जल्द रोक नहीं लगाई, तो हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.

प्रदूषण का कहर: घरों पर जमी काली परत, बीमार हो रहे बच्चे और बुजुर्ग

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों यह स्थिति हर रोज का नजारा बन चुकी है. रात होते ही कोयले से ओवरलोड गाड़ियां सड़कों पर आ धमकती हैं, जिससे पूरी रात भारी जाम लगा रहता है. इस जाम और उड़ती कोयले की धूल के कारण क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है. सड़क के दोनों तरफ स्थित घरों की दीवारों, छतों और सामानों पर कोयले की मोटी-मोटी काली परतें बैठ गई हैं. हवा में फैले इस जहर के कारण छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सांस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. इस भयानक स्थिति के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई सुध लेने वाला नहीं आया है.

जानलेवा साबित हो रही गाड़ियों की रफ्तार, जा चुकी हैं कई जानें

प्रदूषण के अलावा, रात के सन्नाटे में बेपरवाह और तेज गति से दौड़ते इन ट्रकों व हाइवा से सुरक्षा का बड़ा खतरा पैदा हो गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस रूट पर पहले भी कई बार गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई मासूम लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं. इसके बावजूद इन भारी वाहनों का शहर के मुख्य रिहाइशी इलाकों में प्रवेश धड़ल्ले से जारी है.

Read Also: कोल्हान रक्षा संघ के संस्थापक महासचिव स्व. के.सी. हेंब्रम की 10वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

सड़क पर उतरने के सिवा कोई रास्ता नहीं: समाजसेवी

समाजसेवी बाबर कुरैशी ने बताया कि यह शहर के बीचों-बीच रहने वाली एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य और जीवन के साथ सरेआम खिलवाड़ है. बड़ी-बड़ी कंपनियां अपना मुनाफा कमाने के लिए आम जनता की जान जोखिम में डाल रही हैं और जिला प्रशासन मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है. जनता धूल-गर्दा फांकने और गंभीर बीमारियों का शिकार होने के लिए मजबूर है. अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है. यह परेशानी सिर्फ और सिर्फ सड़क पर उतरने से ही खत्म होगी. हम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए, अन्यथा किसी भी दिन हजारों लोग सड़क जाम कर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.

आने-जाने वाले राहगीर और महिलाएं भी परेशान

कोयले से लदे इन भारी वाहनों के कारण सड़कों पर घंटों लंबा जाम लग रहा है. इस वजह से सुबह और शाम के वक्त राहगीरों, ट्यूशन जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक का इन रास्तों से गुजरना मुश्किल हो गया है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *