Delhi/Ranchi: स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर झारखंड अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है. राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक तार्किक रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की स्वास्थ्य चुनौतियों और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं का खाका मजबूती से पेश किया. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में डॉ. अंसारी ने न केवल राज्य की वर्तमान मुश्किलों को बताया, बल्कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए केंद्र से ठोस आर्थिक और ढांचागत सहयोग की भी पुरजोर मांग की.

खनिजों की धरती पर बीमारियों का बोझ, केंद्र से बढ़ाया जाए सहयोग
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. अंसारी ने झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि झारखंड अपनी खनिज संपदा से देश को समृद्ध करता है, लेकिन इसके विपरीत राज्य को खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में फाइलेरिया, मलेरिया, कालाजार, एनीमिया, थैलेसीमिया, टीबी और कैंसर जैसी बीमारियों का प्रकोप चिंताजनक स्तर पर है. डॉ. अंसारी ने कहा, हमारी सरकार इन चुनौतियों से लड़ने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है, लेकिन सीमित संसाधन बड़ी बाधा बन रहे हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत झारखंड को मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है. लगभग चार करोड़ की आबादी वाले झारखंड को केंद्र से और अधिक विशेष आर्थिक सहायता और योजनागत सहयोग की दरकार है.
रांची में एम्स का होना अनिवार्य
डॉ. अंसारी ने सबसे मुखर मांग रांची में एम्स की स्थापना को लेकर रखी. उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में झारखंड में केवल देवघर में एक एम्स है, जो राजधानी रांची से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री के समक्ष वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों के लिए 300 किलोमीटर का सफर तय करना कभी-कभी जानलेवा साबित होता है. गोल्डन ऑवर में सुपर स्पेशियलिटी उपचार न मिल पाने के कारण राज्य के कई नागरिक असमय काल के गाल में समा जाते हैं. झारखंड की जनता को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उनके अपने राज्य की राजधानी में सुलभ हों, इसके लिए रांची में एम्स की स्थापना हर हाल में जरूरी है.
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रिम्स-2: 4100 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना और केंद्र की भूमिका
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के विस्तार की योजना पर बात करते हुए डॉ. अंसारी ने रिम्स-2 के निर्माण का रोडमैप साझा किया. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लगभग 4100 करोड़ रुपये की लागत से रिम्स-2 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसके लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से ऋण लिया जा रहा है. हालांकि, परियोजना को गति देने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से 2000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि की मांग की. स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास जताया कि यदि केंद्र का यह सहयोग मिलता है, तो रिम्स-2 न केवल झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि यह पूर्वी भारत के लिए एक मेडिकल हब के रूप में उभरेगा.
मेडिकल शिक्षा और डॉक्टरों की कमी पर रखी अपनी मांग
• सीटों का विस्तार: राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों को 100 से बढ़ाकर 200 और पीजी सीटों को बढ़ाकर 250 करने की मांग की. इससे न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को समय पर सही परामर्श मिल सकेगा.
• नए मेडिकल कॉलेजों का जाल: स्वास्थ्य मंत्री ने चतरा, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, पाकुड़, रामगढ़, सिमडेगा और साहिबगंज जैसे जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का विस्तार हो सके. साथ ही, उन्होंने झारखंड में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की भी पैरवी की. उन्होंने बताया कि इसके लिए भूमि आवंटन समेत सभी औपचारिकताएं राज्य स्तर पर पूरी कर ली गई हैं और अब केंद्र से महज स्वीकृति का इंतजार है.


