Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने खूंटी के तोरपा थाना क्षेत्र में वर्ष 2013 में पुलिस मुखबिर बताए गए भूपण कुमार सिंह और राम गोविंद की हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक पोलूस सुरीन और नक्सली जेठा कच्छप को बरी कर दिया. दोनों ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी. न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए अदालत ने दोनों अपीलें स्वीकार कर लीं और निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया.
मामले में पोलूस सुरीन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी और अधिवक्ता नवीन कुमार जायसवाल ने पैरवी की, जबकि जेठा कच्छप की ओर से अधिवक्ता मनोज चौबे ने पक्ष रखा. गौरतलब है कि निचली अदालत ने इस मामले में पोलूस सुरीन और जेठा कच्छप को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जेठा कच्छप पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसकी अदायगी नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया था.

क्या था मामला
वर्ष 2013 में खूंटी जिले के तोरपा में पुलिस मुखबिर होने के आरोप में भूपण कुमार सिंह और राम गोविंद की उनके घर के सामने अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी. इस संबंध में तोरपा थाना कांड संख्या 27/2013 दर्ज किया गया था.
मामले में पोलूस सुरीन, नक्सली जेठा कच्छप, कृष्णा महतो सहित छह आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला था. वहीं पीएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप भी इस मामले में अलग से ट्रायल का सामना कर रहे हैं. अभियोजन पक्ष ने ट्रायल के दौरान 12 गवाह पेश किए थे, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह का परीक्षण कराया गया था.
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