Ranchi: झारखंड में कानून-व्यवस्था, पर्व-त्योहार और चुनावी ड्यूटी में पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले होमगार्ड (गृह रक्षक) के जवानों को एक बार फिर अपनी मेहनत की कमाई के लिए भटकना पड़ रहा है. हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव में अपनी सेवाएं देने वाले राज्य के 7,000 होमगार्ड जवानों का मानदेय अब तक लंबित है और राज्य के सभी 24 जिलों के जवान अपने मानदेय की आस लगाए बैठे हैं. झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से अविलंब भुगतान की मांग की है और मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है. सबसे खराब स्थिति रांची, धनबाद और बोकारो की है. राजधानी रांची में सबसे अधिक 1,000 जवानों का मानदेय बकाया है. इसके बाद कोयलांचल क्षेत्र के धनबाद में 700 और बोकारो में 532 जवानों का भुगतान लंबित है. छोटे जिलों में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.
जाने किस जिले में कितने होमगार्ड के जवानों को नहीं मिला मानदेय:
– रांची: 1000

– गुमला: 150
– सिमडेगा: 100
– लोहरदगा: 50
– खूंटी: 150
– लातेहार: 110
– गढ़वा: 300
– पलामू: 400
– चाईबासा: 300
– सरायकेला: 400
– जमशेदपुर: 206
– हजारीबाग: 200
– गिरिडीह:350
– कोडरमा: 100
– रामगढ़: 527
– चतरा: 220
– धनबाद: 700
– बोकारो: 532
– दुमका: 150
– जामताड़ा: 200
– देवघर: 303
– साहेबगंज: 250
– गोड्डा: 202
– पाकुड़: 100
महीनों से होमगार्ड जवानों का मानदेय लंबित है: राजीव कुमार तिवारी:
झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी राजीव कुमार तिवारी का कहना है कि जब आपातकालीन परिस्थितियों में ड्यूटी लगानी होती है तो विभाग बेहद कड़े आदेश जारी करता है. ड्यूटी पर न आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है. लेकिन जब जवानों को उनके हक का मेहनताना देने की बारी आती है तो फाइलें विभागों के बीच अटकी रहती हैं. नगर निगम चुनाव के अलावा स्वास्थ्य विभाग और कई अन्य सरकारी संस्थानों में भी महीनों से होमगार्ड जवानों का मानदेय लंबित है जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है. एसोसिएशन ने साफ किया है कि अगर सरकार ने जल्द ही इन 7,000 जवानों के भत्ते और रुके हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया तो आंदोलन भी कर सकते हैं.


