Click Here
Click Here
Click Here

हजारीबाग: 30 घंटे तक एंबुलेंस में पड़ा रहा प्रवासी मजदूर का शव, मुआवजे की मांग पर अड़े रहे ग्रामीण

Hazaribagh: टाटीझरिया प्रखंड के होलंग गांव में गुजरात में काम करने गए एक प्रवासी मजदूर की मौत के बाद शुक्रवार सुबह तक...

Hazaribagh: टाटीझरिया प्रखंड के होलंग गांव में गुजरात में काम करने गए एक प्रवासी मजदूर की मौत के बाद शुक्रवार सुबह तक बेहद मार्मिक और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. 31 वर्षीय किशोर कुमार का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद करीब 30 घंटे तक एंबुलेंस में ही रखा रहा, क्योंकि परिजन और ग्रामीण मुआवजे तथा मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिलने तक अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं हुए. इस दौरान पूरे गांव में शोक के साथ आक्रोश का माहौल बना रहा.

 गांव पहुंचा शव, अंतिम संस्कार पर लगा विराम

मृतक किशोर कुमार का शव गुरुवार सुबह गांव लाया गया था. लेकिन शव पहुंचने के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने एंबुलेंस को गांव में ही रोक दिया. उनका कहना था कि जब तक संबंधित कंपनी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उचित मुआवजे की घोषणा नहीं करेगी और मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करेगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. करीब 30 घंटे तक शव एंबुलेंस में ही रखा रहा. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटे रहे और कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताते रहे.

गुजरात में मजदूरी करने गया था किशोर

जानकारी के अनुसार किशोर कुमार मजदूरी के लिए गुजरात गया था. उसके पिता जगनाथ महतो ने बताया कि उनका बेटा कुछ दिन पहले ही छुट्टी बिताकर दोबारा काम पर लौटा था. लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत की सूचना मिल गई. परिजनों का आरोप है कि कंपनी ने घटना की पूरी सच्चाई नहीं बताई और न ही समय पर संतोषजनक जानकारी उपलब्ध कराई. यही कारण रहा कि मुआवजे और जवाबदेही की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन पर उतर आए.

परिवार का था एकमात्र सहारा

ग्रामीणों के अनुसार किशोर कुमार परिवार का बड़ा बेटा था और पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी. घर में वृद्ध माता-पिता, पत्नी और सात महीने का एक मासूम बेटा है. कमाने वाले सदस्य की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

मासूम को नहीं पता, पिता अब कभी नहीं लौटेंगे

घटना का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब सात महीने का मासूम अपनी मां की गोद में बैठा एंबुलेंस की ओर देख रहा था. उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है. वहीं, बेटे का शव देखकर मां-बाप और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था. पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा.

Read Also: रेसिंग कारों में एथेनॉल का इस्तेमाल बेहतर, E 20 में बिना तैयारी सरकार आगे नहीं बढ़ेगी – हरदीप सिंह पुरी

कंपनी पर गंभीर आरोप

परिजनों ने संबंधित कंपनी (एक्सेल टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि कंपनी घटना की वास्तविक जानकारी छिपाने की कोशिश कर रही है और मुआवजे के मामले में भी टालमटोल कर रही है. ग्रामीणों ने कहा कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

घंटों चली वार्ता के बाद समाप्त हुआ गतिरोध

कंपनी के प्रतिनिधियों, परिजनों और ग्रामीणों के बीच लंबी बातचीत हुई. आश्वासन और सहमति बनने के बाद गतिरोध समाप्त हुआ. इसके बाद एंबुलेंस से शव उतारा गया और परिजनों ने नम आंखों से किशोर कुमार का अंतिम संस्कार किया.

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर दूसरे राज्यों में काम करने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों, कार्यस्थल पर पारदर्शिता और दुर्घटना की स्थिति में कंपनियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी परिवार को न्याय के लिए अपने प्रियजन के शव के साथ घंटों इंतजार न करना पड़े.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *