Bokaro: बेरमो कोयला क्षेत्र अंतर्गत सीसीएल बीएंडके एरिया के करगली वाटर फिल्टर प्लांट की प्रशासनिक उदासीनता और तकनीकी खामियों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है. वर्ष 1964 में निर्मित यह प्लांट प्रतिदिन दो से तीन मिलियन गैलन पानी शोधन की क्षमता रखता है और इसके संचालन व जलापूर्ति व्यवस्था पर हर महीने एक करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम खर्च किया जा रहा है. बावजूद इसके क्षेत्र की लगभग एक लाख की आबादी को न तो पर्याप्त पानी मिल पा रहा है और न ही शुद्ध पेयजल. वर्तमान में स्थिति इतनी गंभीर है कि पानी में अत्यधिक गंदगी और फिटकरी व ब्लीचिंग जैसे रसायनों के असंतुलित उपयोग के कारण स्थानीय लोगों में बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं. इस बड़े तंत्र को संभालने के लिए यहां एक अधिकारी, पांच फोरमैन और 50 कर्मचारियों का अमला तैनात है, लेकिन धरातल पर नतीजे शून्य हैं. बदहाली की मुख्य वजह अधूरी मरम्मत और लचर व्यवस्था है. प्लांट के वाटर क्लैरिफायर और फिल्टर बेड के जीर्णोद्धार के लिए रांची की मेकॉन कंपनी को करीब तीन करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी यह काम अधर में लटका हुआ है. नतीजा यह है कि पूरा प्लांट केवल एक वाटर क्लैरिफायर और दो फिल्टर बेड के भरोसे हांफते हुए चल रहा है. इससे बोकारो कोलियरी, करगली पॉइंट, जीएम कॉलोनी, डबल स्टोरेज, सुभाषनगर, जवाहरनगर, करगली बाजार, रामनगर, संडेबाजार, कुरपनिया, गांधीनगर, ढोरी जीएम कॉलोनी और स्टाफ क्वार्टर सहित दर्जनों प्रमुख इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

स्थानीय निवासियों में लचर व्यवस्था को लेकर आक्रोश
समस्या सिर्फ तकनीकी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ी है. हाल ही में प्लांट से पंप के कीमती पार्ट चोरी होने की घटना ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है. चहारदीवारी की कम ऊंचाई और सुरक्षा घेरे के अभाव के कारण असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं. हालांकि, प्लांट प्रभारी उत्कर्ष बक्शी ने हाल ही में 12 नंबर पंप को चालू कराकर और क्लैरिफायर की सफाई करवाकर स्थिति को थोड़ा संभालने का प्रयास किया है, लेकिन मूलभूत और दीर्घकालिक समस्याओं का समाधान अभी भी कोसों दूर है. दूसरी ओर, अधीक्षण अभियंता अमरेश प्रसाद का दावा है कि कार्य प्रावधानों के तहत ही किया जा रहा है और प्रतिदिन 12 से 14 घंटे जलापूर्ति की जा रही है. साथ ही उन्होंने चूना-फिटकरी की उपलब्धता और मेकॉन कंपनी के लंबित कार्यों की जिम्मेदारी सिविल विभाग के अधीन होने की बात कही है. स्थानीय निवासियों में इस लचर व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है. जनता की मांग है कि फिल्टर प्लांट परिसर में उगी झाड़ियों की तत्काल सफाई हो, रसायनों की नियमित व संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और मेकॉन कंपनी के लंबित मरम्मत कार्यों को अविलंब पूरा कराया जाए. यदि सीसीएल प्रबंधन और सिविल विभाग ने समय रहते इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह संकट एक भयावह जल संकट और बीमारी का रूप ले सकता है.
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