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हजारीबाग: क्या ऐसे बचेगी सड़क हादसों में जान? टाटीझरिया में एक महीने से वेंटिलेटर पर थी 108 एम्बुलेंस, सांसद की फटकार के बाद जागा सिस्टम

Hazaribagh : सड़क हादसों के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले NH-522 पर स्थित टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने...

Hazaribagh : सड़क हादसों के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले NH-522 पर स्थित टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. आपातकालीन स्थिति में मरीजों के लिए लाइफलाइन मानी जाने वाली सरकारी 108 एम्बुलेंस सेवा यहां पिछले एक महीने से खुद वेंटिलेटर पर पड़ी थी. इस गंभीर लापरवाही के कारण पूरा प्रखंड एम्बुलेंस विहीन हो गया था और गरीब मरीजों व सड़क हादसों के शिकार लोगों को निजी वाहनों के भरोसे रहना पड़ रहा था. जब इस महा-लापरवाही की गूंज हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए इस पर कड़ा संज्ञान लिया और सिस्टम को दुरुस्त करने का सीधा अल्टीमेटम दे दिया.

पिछले साल सांसद की जिद पर मिली थी सौगात, अफसरों ने बना दिया कबाड़

गौरतलब है कि टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र में आए दिन होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय जनता लंबे समय से एक एम्बुलेंस की मांग कर रही थी. जनता के इस दर्द को समझते हुए पिछले वर्ष हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल के विशेष और कड़े प्रयासों के बाद, तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह के द्वारा क्षेत्र को एक चमचमाती 108 एम्बुलेंस की सौगात दी गई थी. मकसद था कि NH पर जैसे ही कोई हादसा हो, चंद मिनटों में घायल को अस्पताल पहुंचाया जा सके. लेकिन विडंबना देखिए, पिछले करीब एक महीने से एक मामूली तकनीकी खराबी के नाम पर इस एम्बुलेंस को किनारे खड़ा कर कबाड़ में तब्दील होने के लिए छोड़ दिया गया था.

सांसद के निर्देश पर मीडिया प्रतिनिधि ने की घेराबंदी

मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने तत्काल अपने सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को मैदान में उतारा और संबंधित अधिकारियों से सीधी बात कर सेवा सुचारु कराने का निर्देश दिया. सांसद के आदेश पर रंजन चौधरी ने तत्परता दिखाते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के हजारीबाग डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित कुमार से फोन पर कड़े लहजे में बात की और अविलंब तकनीकी खराबी दूर करने को कहा. इस बातचीत के दौरान जहां एक तरफ को-ऑर्डिनेटर ने अगले एक से दो दिनों के भीतर एम्बुलेंस को बनवाकर सेवा में पुनः बहाल करने का भरोसा दिया, वहीं दूसरी तरफ एम्बुलेंस संचालन करने वाली निजी कंपनी और झारखंड सरकार के रवैये पर उनका दर्द और सिस्टम का खोखलापन सरेआम छलक गया. जिला को-ऑर्डिनेटर रोहित कुमार ने बेबसी जाहिर करते हुए साफ कहा कि एम्बुलेंस संचालन को लेकर स्थिति बहुत ही खराब है। ऊपर से कोई फंड या सहयोग नहीं मिल रहा है, इसलिए वे फिलहाल अपने निजी पैसे खर्च करके इस एम्बुलेंस की मरम्मत करवा रहे हैं. अधिकारी का यह बयान साफ करता है कि सूबे का स्वास्थ्य महकमा किस कदर भगवान भरोसे चल रहा है.

NH पर सफर करने वाले राहगीरों और ग्रामीणों को बड़ी राहत की आस

सांसद मनीष जायसवाल की इस त्वरित और कड़क पहल के बाद अब टाटीझरिया के स्थानीय ग्रामीणों और NH-522 पर सफर करने वाले हजारों राहगीरों ने राहत की सांस ली है. इस क्षेत्र में त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए 108 एम्बुलेंस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समय पर एम्बुलेंस मिलने से यहां दर्जनों लोगों की जान बचाई जा चुकी है. अब देखना यह है कि को-ऑर्डिनेटर के वादे के मुताबिक अगले दो दिनों में यह एम्बुलेंस सड़कों पर दौड़ती है या फिर कंपनी और सरकार की बेरुखी का शिकार होकर दोबारा बंद हो जाती है. फिलहाल, जनता सांसद की इस जनहितैषी पहल की सराहना कर रही है.

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