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Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक संदेश गूंज रहा है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कैबिनेट की बैठक के दौरान मंत्रियों की कार्यशैली पर न केवल सवाल उठाए हैं, बल्कि उन्हें उनकी संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी का आईना भी दिखाया है.फाइलों को बिना पढ़े या बिना समझे हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए वित्त मंत्री ने दो टूक कहा है कि सरकारी फाइलें ‘रबड़ स्टैम्प’ के लिए नहीं होतीं.

क्या है पूरा मामला
हाल ही में कैबिनेट की एक बैठक के दौरान तीन मंत्रियों ने कुछ फाइलों और प्रस्तावों को लेकर सवाल खड़े किए थे, जिसके जवाब में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह कड़ी टिप्पणी की. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें बारीकी से पढ़ना, उनके कानूनी पहलुओं को समझना और नियमों की कसौटी पर परखना अनिवार्य है.
बिना पढ़े साइन करना है तो अभी कर दें, लेकिन यह शासन नहीं
वित्त मंत्री की टिप्पणी का सबसे मारक हिस्सा वह रहा जब उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया और मंत्रियों के दायित्व के बीच का अंतर स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, “फाइल पढ़ने में समय लगता है. अगर मुझे केवल हस्ताक्षर ही करने होते, तो मैं अभी कर देता. लेकिन यह प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है. एक मंत्री का दायित्व केवल साइन करना नहीं, बल्कि हर निर्णय के कानूनी और प्रशासनिक प्रभावों को समझना है. उनकी यह बात साफ करती है कि सरकार चलाने का अर्थ केवल फाइलों को गति देना नहीं है, बल्कि उस गति की दिशा और शुचिता भी सुनिश्चित करना है. बिना तथ्यों को समझे लिए गए निर्णय आगे चलकर बड़े कानूनी संकट या वित्तीय अनियमितता का कारण बन सकते हैं.
जवाबदेही और पारदर्शिता: शासन के दो स्तंभ
राधाकृष्ण किशोर ने जोर देकर कहा कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है.उन्होंने कहा कि बिना नियमों को समझे लिए गए निर्णय भविष्य में सरकारी खजाने और प्रशासन की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं.मंत्री पद पर बैठा व्यक्ति जनता के प्रति जवाबदेह है. फाइलों पर हस्ताक्षर करना महज एक कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसे निभाना पड़ता है.उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में लिए गए फैसले न केवल गलत संदेश देते हैं, बल्कि अधिकारियों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाते हैं.
मंत्रियों के लिए कड़ा संदेश
यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि कैबिनेट के भीतर सामंजस्य और अनुशासन की कमी कहीं न कहीं सरकार की छवि को प्रभावित कर रही है. जब मंत्री स्वयं फाइलों के कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हैं या बिना पढ़े उन पर आपत्ति जताते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती को दर्शाता है. वित्त मंत्री की टिप्पणी ने उन मंत्रियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है जो शायद फाइलों के प्रति गंभीरता नहीं बरत रहे थे. उनका यह स्पष्टीकरण मंत्रियों को यह याद दिलाने के लिए पर्याप्त है कि उनका पद केवल विशेषाधिकारों के लिए नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी नीतियों के प्रति कड़े पहरेदार की भूमिका निभाने के लिए है.


