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सरायकेला: चांडिल बांध का जलस्तर 180 मीटर से नीचे रखा जाए, नहीं तो कई गांवों में बाढ़ का खतरा: राकेश रंजन महतो

Saraikela: झारखंड राज्य में लगातार हो रही बारिश के बीच चांडिल बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. विस्थापित अधिकार मंच...

चांडिल बांध के बढ़ते जलस्तर को लेकर बाढ़ का खतरा
चांडिल बांध के बढ़ते जलस्तर को लेकर बाढ़ का खतरा

Saraikela: झारखंड राज्य में लगातार हो रही बारिश के बीच चांडिल बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने चेतावनी दी है कि यदि बांध का जलस्तर 180 मीटर से नीचे नहीं रखा गया तो ईचागढ़, कुकड़ू, नीमडीह और चांडिल के कई गांवों में बाढ़ और तबाही की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. राकेश रंजन महतो ने बताया कि वर्तमान में चांडिल बांध के चार फाटक 20-20 सेंटीमीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है. बांध का जलस्तर लगभग 179.25 मीटर तक पहुंच चुका है. बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और इसके 180 मीटर से ऊपर जाने की आशंका है. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की बैठक में पहले ही निर्णय लिया गया था कि बांध का जलस्तर 180 मीटर से ऊपर नहीं रखा जाएगा, ताकि विस्थापित गांवों को जलभराव और बाढ़ का सामना न करना पड़े.

ईचागढ़, कुकड़ू, नीमडीह और चांडिल के कई गांव खतरे की जद में

राकेश रंजन महतो ने कहा कि अगर समय रहते फाटकों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई तो पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी कई गांव जलमग्न हो जाएंगे. अचानक पानी छोड़े जाने से हजारों परिवार प्रभावित होंगे. उन्होंने बताया कि अचानक अधिक पानी छोड़े जाने पर घरों में पानी घुसना, कच्चे मकान ढहना, फसल नष्ट होना, पशुधन बहना, सड़क-पुल क्षतिग्रस्त होना और लोगों का विस्थापन हो सकता है. साथ ही पेयजल दूषित होने, बिजली बाधित होने, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने और संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा है. रात में जलस्तर बढ़ने पर जनहानि की आशंका भी बनी हुई है.

उन्होंने कहा कि ईचागढ़ प्रखंड के पातकुम, ईचागढ़, लोपसोडीह, मैंसाढ़ा, कालीचामदा, बाबूचामदा, मातकामडीह, रुगड़ी, कुकड़ू के कुमारी, झापागोड़ा, दयापुर, उडाटांड़, दुलमी, ओड़िया, केंदाआंद, बांदावीर, नीमडीह के आण्डा, हुटू, लावा, कल्याणपुर, काशीपुर, तिलाईटांड़, सीमा और चांडिल के रसुनिया, पियालडीह, रूआनी, हाथीनादा, डिमूडीह सहित कई गांव गंभीर खतरे की जद में हैं. उन्होंने बांध के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मौसम को देखते हुए जलस्तर का वैज्ञानिक प्रबंधन कर इसे 180 मीटर से नीचे रखा जाए. चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए और कोई जन-धन की हानि होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी.

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