विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची जिला गृह रक्षक (होम गार्ड) भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर कई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मेरिट लिस्ट से नाम हटा दिए गए, अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी याचिकाओं को निष्पादित कर दिया और अभ्यर्थियों को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए रांची के (डीसी)उपायुक्त के समक्ष नए सिरे से आवेदन देने की छूट दी है. यह पूरा मामला होम गार्ड नियुक्ति के लिए जारी विवाद विज्ञापन संख्या 01/2016 से जुड़ा हुआ है. इस संबंध में बिजय तिग्गा, छोटू साहू, मुन्ना कच्छप एवं अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि उन्हें भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों जैसे कि प्रथम परिणाम (09 मार्च 2018), द्वितीय सूची (08 सितंबर 2018) और तृतीय परिणाम (14 अप्रैल 2022)— में सफल घोषित किया गया था. जिसके बाद उनके दस्तावेजों का सत्यापन भी पूरा हो चुका था और वे केवल प्रशिक्षण पर भेजे जाने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन इस बीच विभाग की ओर से 27 दिसंबर 2022 को एक अंतिम चयन सूची जारी की गई जिसमें पहले से सफल घोषित इन अभ्यर्थियों को अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया और उनसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चुन लिया गया और उन्हें चिकित्सा परीक्षण व प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया.

नई संशोधित मेधा सूची जारी करने की मांग अदालत से की थी:
अभ्यर्थियों ने इस अंतिम चयन सूची और कमांडेंट द्वारा जारी ट्रेनिंग आदेशों को रद्द करने तथा नई संशोधित मेधा सूची जारी करने की मांग अदालत से की थी . सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि होम गार्ड के उक्त विज्ञापन के तहत अभी भी कई पद रिक्त पड़े हुए हैं. इसलिए अदालत सरकार को इन रिक्तियों की पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ताओं के मामलों पर विचार करने का निर्देश दे. दूसरी ओर राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने इस बात से इनकार किया कि गैर-तकनीकी पदों पर कोई सीट खाली बची है. हालांकि उन्होंने सहमति जताई कि अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. दोनों पक्षों की बहस और दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सभी रिट याचिकाओं को इस निर्देश के साथ निष्पादित कर दिया कि याचिकाकर्ता अपने दावों के संबंध में रांची डीसी के पास अभ्यावेदन सौंपें. इसके साथ ही अदालत ने रांची डीसी को आदेश दिया है कि वह आवेदन प्राप्त होने के बाद पूरे रिकॉर्ड का गहन सत्यापन करेंगे . इसके बाद, विज्ञापन से जुड़े नियमों और कानूनों को ध्यान में रखते हुए 20 सप्ताह के भीतर एक तर्कसंगत और उचित आदेश पारित करेंगे. अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर रिकॉर्ड जांच में किसी भी अभ्यर्थी का दावा सही और वास्तविक पाया जाता है तो उसके अगले छह सप्ताह के भीतर आवश्यक परिणामी आदेश (जैसे नियुक्ति या प्रशिक्षण से जुड़ा आदेश) भी जारी कर दिया जाए.


