NewsWave Desk: अयोध्या की पावन धरती पर आस्था के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’ का पर्दाफाश हुआ है. राम मंदिर के नाम पर दान करने वाले भक्तों के साथ न केवल विश्वासघात हुआ, बल्कि उन्हें ठगने का एक सुनियोजित जाल भी बिछाया गया था.
जांच में हुआ नया खुलासा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे गहरी हो रही है, वैसे-वैसे काले कारनामों की परतें उधड़ रही हैं. ताजा खुलासे के अनुसार, आरोपी केवल दानपात्र से पैसे चोरी नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से फर्जी रसीदें छपवाकर भक्तों को चूना लगाने का नापाक काम भी किया था. श्रद्धालुओं को लगता था कि वे प्रभु के चरणों में अपना अंशदान अर्पित कर रहे हैं, जबकि असल में उनका पैसा ठगों की जेब में जा रहा था.

हूबहू असली जैसी थीं फर्जी रसीदें
खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये फर्जी रसीदें हूबहू असली जैसी दिखती थीं. इन पर ट्रस्ट का लोगो भी चस्पा था, जिससे श्रद्धालुओं को तनिक भी संदेह नहीं होता था. यह ‘फेक रसीद रैकेट’ तब तक सक्रिय रहा, जब तक मंदिर में ऑनलाइन दान व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो गई.
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे? आरोप है कि चोरी का मामला समय पर पकड़ने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई, जो अब पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद बन गया है.


