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लोहरदगा में हाथियों का तांडव, दो मकान ध्वस्त

Lohardaga: एक बार फिर जंगली हाथियों का आतंक देखने को मिला है. करीब एक माह बाद हाथियों का झुंड कुडू प्रखंड के...

लोहरदगा में हाथियों का तांडव, दो मकान ध्वस्त
लोहरदगा में हाथियों का तांडव, दो मकान ध्वस्त

Lohardaga: एक बार फिर जंगली हाथियों का आतंक देखने को मिला है. करीब एक माह बाद हाथियों का झुंड कुडू प्रखंड के चीरी पंचायत पहुंच गया और देर रात गांव में जमकर उत्पात मचाया. हाथियों ने दो ग्रामीणों के कच्चे मकानों को ध्वस्त कर दिया तथा घरों में रखा धान, चावल और अन्य खाद्य सामग्री खाकर नष्ट कर दी. घटना के दौरान घर में मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई. इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रातभर जागकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं.

परिवार में अफरा-तफरी मच गई

जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड कैरो प्रखंड से होते हुए कड़ाक क्षेत्र के रास्ते चीरी जंगल पहुंचा था. बुधवार की शाम जंगल से निकलकर हाथियों का झुंड चीरी पंचायत के बड़का टोली गांव में प्रवेश कर गया. रात लगभग दस बजे जब अधिकांश ग्रामीण खाना खाकर सो चुके थे, तभी हाथियों का झुंड गांव में पहुंचा और सबसे पहले शनिया उरांव के घर पर हमला बोल दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों ने कुछ ही मिनटों में शनिया उरांव के कच्चे मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया. मकान की दीवारों और छप्पर को तोड़ते हुए हाथी घर के भीतर घुस गए और वहां रखा धान, चावल तथा अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री को खा गए. कई सामानों को उन्होंने पैरों तले रौंदकर नष्ट भी कर दिया. अचानक हुए इस हमले से शनिया उरांव और उनके परिवार में अफरा-तफरी मच गई. किसी तरह पति-पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे और अपनी जान बचाई.

गांव में शोर मच गया

हाथियों के हमले की सूचना मिलते ही गांव में शोर मच गया और ग्रामीण एकत्र होने लगे. ग्रामीणों ने मशाल, टॉर्च और पटाखों की मदद से हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया. हालांकि, हाथियों का झुंड गांव से बाहर जाने के बजाय पारसनाथ उरांव के मकान की ओर बढ़ गया और वहां भी जमकर उत्पात मचाया. हाथियों ने पारसनाथ उरांव के कच्चे मकान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा. काफी मशक्कत और घंटों की कोशिश के बाद ग्रामीण हाथियों के झुंड को वापस चीरी जंगल की ओर खदेड़ने में सफल हुए. लेकिन हाथियों का आतंक यहीं नहीं थमा. जानकारी के अनुसार, हाथियों के झुंड ने सुंदरू पंचायत के सुकुमार गांव में भी मनोज उरांव के मकान को नुकसान पहुंचाया है. लगातार हो रही इन घटनाओं से आसपास के गांवों के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है.

मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की

घटना के बाद गुरुवार सुबह चीरी पंचायत के मुखिया रामेश्वर लोहरा मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने वन विभाग को घटना की जानकारी देते हुए प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की. मुखिया ने कहा कि बरसात के मौसम में मकानों के क्षतिग्रस्त हो जाने से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भोजन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से हाथियों का झुंड लगातार गांवों की ओर रुख कर रहा है, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ गया है. किसानों की फसलें नष्ट हो रही हैं और कई परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. लोगों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. हाथियों के भय से चीरी बड़का टोली सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरा देते रहे. ग्रामीणों को आशंका है कि हाथियों का झुंड दोबारा गांव की ओर लौट सकता है. ऐसे में लोग भय और अनिश्चितता के बीच जीवन गुजारने को मजबूर है.

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